
कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में आयोजित तीन दिवसीय आईएमए सीजीपी रीफ़्रेशर कोर्स के तीसरे दिन व्याख्यान माला के दौरान नाक, कान, गला सत्र में वरिष्ठ नाक, कान , गला सर्जन डॉ राजीव पचौरी ने “ईएनटी आपातस्थिति के दौरान कैसे निपटें” विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जैसा कि हम जानते है , हमारी अधिकांश मुख्य इंद्रियाँ नाक,कान,गला (ईएनटी ) के भाग हैं।
इसलिए उनमें आये किसी भी अचानक व्यवधान / क्षति के लिए तत्काल प्रबंधन की आवश्यकता होती है, अपने देश के अधिकांश अस्पतालों में ऐसी गंभीर आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए चौबीसों घंटे ईएनटी सर्जन की सुविधा नहीं होती है, एक चिकित्सक के रूप में हमें ईएनटी सर्जन द्वारा विशेषज्ञ प्रबंधन शुरू होने तक रोगी को ठीक रखने के लिए बुनियादी बातें पता होनी चाहिए, हमें EPISTAXIS (नकसीर ) जैसी विभिन्न तीव्र आपात स्थितियों के प्रबंधन के बारे में अवश्य पता होना चाहिए, किसी बाहरी वस्तु(Foreign body) का Ingestion/ inhalation ( खाने / श्वास नली में जाना) , कान के पर्दे का चोट से फटना, गला कटना, अचानक श्वास नली में आये अवरोध, चेहरे पर चोट से घाव, चेहरे के कंकाल का फ्रैक्चर, आदि, लुडविग एनजाइना, एपिग्लोटाइटिस, ऑब्सट्रक्टिव dysphasia / dyspnea आदि जैसी तीव्र आपात स्थितियों और टॉन्सिल में फोड़ा(peritonsiller abscess) , अचानक आवाज़ रुकना, अचानक एलर्जी ऐंठन, अचानक जबड़े का बंद होना आदि जैसी अन्य आपात स्थितियों में तत्काल प्रबंधन की आवश्यकता होती है, इसलिए एक सामान्य चिकित्सक या अन्य विशिष्टताओं के विशेषज्ञ के रूप में आप सभी के लिए इन आपात स्थितियों के प्रबंधन (Emergency Management) की मूल बातें जानना बहुत महत्वपूर्ण है। इस सत्र के Director डॉ रोहित महरोत्रा व डॉ बृजेन्द्र शुक्ला रहे, सत्र के chairpersons डॉ संजीव कुमार, डॉ राजीव चित्रांशी, डॉ राजन भार्गव रहे, सत्र के दौरान बड़ी संख्या में शहर के अन्य जाने माने नाक कान गला सर्जन उपस्थित रहे.
कैंसर है बहुरूपियाः “ कभी कभी बोल देता है धावा बिना आहट…

लखनऊ कैंसर इंस्टिट्यूट की प्रमुख कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ निशी श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से कैंसर का एक परिवर्तित रूप दिखने लगा है। ये इस पर निर्भर करता है कि कैंसर शरीर के किस अंगे को प्रभावित कर रहा है,अचानक से हाथों पैरों मैं कमज़ोरी आ जाना, उल्टी- खांसी में ख़ूनके टुकड़े आना,लगातार सिर दर्द, मल- मूत्र का रुक जाना, इत्यादि लक्षण हो सकते हैं।शहर की प्रमुख कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ प्रीति शुक्ला ने बताया शरीर के किसी सिग्नल को अनदेखा ना करें, क्योंकि कैंसर लाइलाज़ नहीं हैऔर समय रहते इस पर रोकथाम संभव है।

संयोजक डॉ विकास शुक्ला ने बताया ब्रेन ट्यूमर अक्सर केवल सिर दर्द और उल्टी के साथ ही आते हैं जिन्हें कई बार माइग्रेन समझ लिया जाता है। इस अवसर पर president डॉ नंदिनी रस्तोगी और सेक्रेटरी डॉ कुणाल सहाय, डॉ अरुण प्रकाश द्विवेदीऔर डॉ प्रमोद मौजूद रहे।

किसी भी व्यक्ति की दिनचर्या में मलत्याग बहुत ही महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. भोजन में आए परिवर्तन तथा जीवन शैली में तनाव एवं भाग दौड़ का समायोजन, मलत्याग की प्रक्रिया को विपरीत रुप से प्रभावित करता है. डॉक्टर बृजेंद्र सिंह, सीनियर गैस्ट्रो सर्जन कानपुर नगर ने आज सुबह कानपुर IMA CGP में मल द्वार से जुड़ी बीमारियों के बारे में बताया कि, शर्म और झिझक के कारण आम तौर पर प्रभावित व्यक्ति मलद्वार से जुड़ी समस्याओं को या तो स्वयं ठीक करने का प्रयास करते हैं अथवा चिकित्सीय सलाह लेने में विलंब करते हैं. फलस्वरूप कुछ बीमारियां गम्भीर रूप धारण कर लेती हैं तथा कार्य एवं स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं .

डॉक्टर बृजेंद्र सिंह ने बताया कि, मलत्याग के दौरान दर्द , रक्त स्राव, गाँठ या मवाद आना मुख्य लक्षण हैं. मलद्वार में घाव फ़िशर, पाइल्स (मस्सा ) या फोड़े इनके मुख्य कारण है. इन कारणों का उचित समय में पहचान एवं उचित निदान करना अति आवश्यक है .

अधिकांश मरीज़ साधारण जॉच एवं दवाइयाों तथा भोजन में उचित परिवर्तन करने से ठीक किए जा सकते हैं . लगभग 8-10 प्रतिशत मरीज़ों को शल्य चिकित्सीय सलाह की ज़रूरत पड़ सकती है . अंत में डॉक्टर बृजेंद्र सिंह ने बताया कि फ़ाइबर युक्त भोजन, छह से आठ ग्लास पानी, ताज़े फल का सेवन एवं व्यायाम, मल त्याग की प्रक्रिया को सुलभ बना देता है तथा मलद्वार की बीमारियों से बचाव करता है.
