
कानपुर
सीएम कार्यालय से जनता से जुड़े पांच विभागों की सबसे ज्यादा शिकायतों का फीडबैक लिया गया। नगर निगम की दो हजार शिकायतों में 1147 का फीडबैक असंतुष्ट करने वाला रहा।
कानपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वपूर्ण योजनाओं से भी अधिकारी खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं। आईजीआरएस और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में आ रही शिकायतों का भी ऑफिस में बैठे-बैठे निस्तारण कर दिया गया। आचार संहिता के चलते चार माह बाद जुलाई में सीएम कार्यालय से फीडबैक लिया गया, तो अफसरों की पोल खुल गई।
शिकायत करने वाले अधिकांश लोगों ने नाराजगी जाहिर की। इस पर जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने 210 अफसरों को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। फीडबैक में 71 विभाग तो ऐसे पाए गए जिनके अधिकारियों ने एक भी समस्या का सही से निस्तारण नहीं किया। जिला उपायुक्त मनरेगा स्तर पर 12 शिकायतें आईजीआरएस पर की गईं, लेकिन एक भी निस्तारित नहीं हुई।
इसी प्रकार प्रभारी चिकित्साधिकारी, घाटमपुर, बिल्हौर, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, बीडीओ ककवन, सरसौल, पतारा, खंड शिक्षा अधिकारी, सब रजिस्ट्रार नरवल, अधिशासी अभियंता विद्युत समेत अन्य विभागों ने एक भी समस्या के निस्तारण में गंभीरता नहीं दिखाई। इनकी सभी शिकायतों का फीडबैक खराब मिला।
पांच विभागों की सबसे ज्यादा शिकायतों का लिया फीडबैक
सीएम कार्यालय से जनता से जुड़े पांच विभागों की सबसे ज्यादा शिकायतों का फीडबैक लिया गया। नगर निगम की दो हजार शिकायतों में 1147 का फीडबैक असंतुष्ट करने वाला रहा। अधिशासी अभियंता विद्युत की 619 शिकायतों में 357 का फीडबैक खराब मिला।
80 फीसदी शिकायतों का ठीक से समाधान नहीं हुआ
अधिशासी अभियंता जलकल की 410 शिकायतों में 215 का फीडबैक खराब मिला। समाज कल्याण विभाग की 315 शिकायतों में 276 का फीडबैक खराब मिला। महाप्रबंधक जलकल स्तर की 126 शिकायतों में 82 का फीडबैक खराब मिला। पंचायतीराज विभाग की 125 शिकायतों में 94 का फीडबैक खराब रहा। इन विभागों की 80 फीसदी शिकायतों का ठीक से समाधान नहीं हुआ।
आईजीआरएस में शिकायतों का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण किया जाना अनिवार्य है। किसी भी लापरवाह अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। आगे जिस भी विभाग की लापरवाही मिलेगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। -राकेश कुमार सिंह, जिलाधिकारी
