कानपुर प्रेस क्लब के तमाम पत्रकार जानिए ”कौन सी वसूली” के चक्कर में लगातार हो रहे गिरफ्तार !

Avneesh Dixit
Avneesh Dixit
Avneesh Dixit

कानपुर महानगर के सिविल लाइन्स स्थित 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य की जमीन पर कब्जा करने वाला मामला इतना लंबा खिंचेगा, यह कब्जा करने वालों को भी शायद गुमान न रहा हो. अपनी हनक और सिस्टम से मिलीभगत के चलते हर बार बच निकलने वाला टीवी पत्रकार अवनीश दीक्षित इस बार न सिर्फ खुद फंसा बल्कि पत्रकारिता की आड़ लेकर मजलूमों पर कहर बरसाने वालों का आए दिन नेक्सस उधड़ता चला जा रहा है.

इसी कड़ी में अब कानपुर कमिश्नरेट के किदवईनगर और बर्रा थाने में दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं. किदवईनगर पुलिस ने जूही निवासी एक विधवा राबिया बेगम की तहरीर पर प्रेस क्लब से जुड़े प्रदीप श्रीवास्तव, एबीपी न्यूज के पत्रकार व कानपुर प्रेस क्लब के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीरज अवस्थी व मुंतजिर अंसारी समेत 50 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. इसके अलावा पुलिस ने पत्रकार नीरज अवस्थी व मुंतजिर अंसारी को गिरफ्तार भी कर लिया है.

थाना बर्रा में कानपुर प्रेस क्लब के कार्यकारिणी सदस्य दिवस पांडेय, सत्यम गोस्वामी, अभिषेक शर्मा युवा पर मुकदमा दर्ज किया गया है. आरोप है कि इन लोगों ने पनौरी गांव निवासी एक लोडर चालक को फर्जी खबरों का भय दिखाकर करीब एक लाख रुपयों की वसूली कर ली है. इनके साथ योगेश दीक्षित नाम के एक पत्रकार का भी नाम सामने आया है.

इन सभी के अलावा जांच की आंच कानपुर प्रेस क्लब के पूर्व महामंत्री कुशाग्र पांडेय पर आई है. अवनीश के अध्यक्ष रहते यह शख्स प्रेस क्लब का महामंत्री था. बीते दिनों अवनीश ने जो 12 वसूलीबाजों के नाम गिनाए थे, उनमें कुशाग्र का नाम भी शामिल होना बताया जा रहा है. उधर कमलेश फाइटर पर दो-दो वसूली के मुकदमे होने के बाद लगातार शिकंजा कसा जा रहा है.

कौन है कारोबारी सुनील शुक्ला? जिसने मर चुके मजदूर को ‘जिंदा’ किया… नौकरी करवाई फिर मार डाला

कौन है कारोबारी सुनील शुक्ला? जिसने मर चुके मजदूर को ‘जिंदा’ किया… नौकरी करवाई फिर मार डाला

एक हजार करोड़ रुपये की नजूल की जमीन कब्जाने की कोशिश के मामले में गिरफ्तार कारोबारी सुनील शुक्ला उर्फ जीतू शुक्ला का एक और खेल सामने आया है।

आरोप है कि सुनील शुक्ला ने गरीब संविदा कर्मियों के पीएफ का पैसा ही नहीं डकारा, बल्कि मर चुके एक मजदूर को फाइलों में जिंदा दिखाकर नौकरी कराई और उसका पीएफ का पैसा निकालने के बाद दोबारा मार डाला। पुलिस अब इस प्रकरण को लेकर भी जांच कर रही है।

गलत खातों में ट्रांसफर की गई राशि

दैनिक जागरण की पड़ताल के आधार पर 12 सितंबर 2022 को कर्मचारी भविष्य निधि की प्रवर्तन अधिकारी वंदना पांडेय ने ललित गुप्ता और मुकुल चौबे के खिलाफ काकादेव थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।

आरोप था कि कंपनी की मदद से वास्तविक भविष्य निधि सदस्यों की राशि गलत खातों में स्थानांतरित कर दी गई, जिस वक्त मामला सामने आया था, उस वक्त जानकारी मिली थी कि ललित गुप्ता ई-रिक्शा चालक है और उसे इसकी जानकारी नहीं है।

हालांकि, अब जब दोबारा प्रकरण की जांच शुरू हुई तो सामने आया कि ललित गुप्ता पीएफ घोटाले के आरोपी सुनील शुक्ला का पूर्व कार चालक था।

केस से जुड़े जो दस्तावेज पुलिस ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन कार्यालय से निकाले थे, उनकी पड़ताल से एक और कहानी सामने आई है।

इस तरह से किया खेल

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन कार्यालय के दस्तावेजों के मुताबिक, विवादित कंपनी एसएमसी मैन पावर सॉल्यूशन कोरोना काल के दौरान वर्ष 2020 में बनी थी। कंपनी में प्रदीप पुरी और अमित पुरी को भी नौकरी पर दिखाया गया।

सच्चाई यह है कि प्रदीप पुरी की 15 अप्रैल 2016 को ही बीमारी के चलते मृत्यु हो गई थी। तब प्रदीप मैसर्स भारत ट्रेडर्स प्रोपराइटर नाम की फर्म में काम करते थे। परिवार वालों ने प्रदीप का पीएफ का पैसा नहीं निकाला था।

इसकी जानकारी सुनील शुक्ला और उनके गिरोह को थी। इसीलिए दिवंगत हो चुके प्रदीप को पहले नौकरी पर दिखाया और पुराने पीएफ खाते में पीएफ का पैसा भी जमा करते रहे। बाद में प्रदीप के पीएफ में जमा लगभग 80 हजार रुपये की रकम धोखाधड़ी करके निकाल ली।

प्रदीप की पत्नी अनीता पुरी ने मामले में पुलिस से शिकायत की है। एडिशनल डीसीपी सेंट्रल महेश कुमार ने बताया कि काकादेव में दर्ज मामले की केस डायरी तलब की गई है। जो भी नए तथ्य सामने आ रहे हैं, उन्हें जांच में समाहित किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *