
आजकल लोग स्वास्थ्य संबंधी सवालों के जवाब पाने के लिए एआई चैटबॉट्स का सहारा ले रहे हैं, लेकिन ऐसा करना जोखिम भरा हो सकता है। एआई के पास न तो मेडिकल डिग्री होती है और न ही आपकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य जानकारी, जिससे यह गलत या अधूरी जानकारी प्रदान कर सकता है। इसका परिणाम गलत निदान, दवाओं के रिएक्शन या एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी गंभीर समस्याओं के रूप में सामने आ सकता है।
आज के समय में, जब भी हमें किसी सवाल का जवाब चाहिए होता है, तो हम फौरन एआई चैटबॉट्स का सहारा लेते हैं। सेहत से जुड़े सवालों के लिए भी कई लोग अब इन डिजिटल साधनों की मदद लेने लगे हैं। सिरदर्द, पेट दर्द या हल्की खांसी जैसी समस्याओं में डॉक्टर के पास जाने के बजाय एआई से सलाह लेना अधिक सुविधाजनक और मुफ़्त लगने लगा है। हालांकि, बहुत बार लोग इस बात पर ध्यान देना भूल जाते हैं कि एआई द्वारा दी गई मेडिकल सलाह उनकी सेहत के लिए सही और सुरक्षित भी है या नहीं। इंटरनेट और एआई के बढ़ते चलन ने सेल्फ-मेडिकेशन की एक नई, लेकिन चिंताजनक लहर को जन्म दिया है। आइए यह समझने की कोशिश करें कि यह डिजिटल डॉक्टरिंग आपकी सेहत के लिए कितनी भरोसेमंद है।
एआई डॉक्टर नहीं है, बल्कि यह केवल जानकारी प्रदान करने का एक माध्यम है।
सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि एआई मॉडल या अन्य चैटबॉट कैसे कार्य करते हैं। ये सिस्टम इंटरनेट पर उपलब्ध करोड़ों पन्नों के डेटा का विश्लेषण करके जवाब देते हैं। इनके पास न तो मेडिकल डिग्री होती है और न ही आपके शरीर की वास्तविक स्थिति को समझने की योग्यता।
मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर दवाइयां देते हैं, जो आपकी उम्र, वजन, एलर्जी, अनुवांशिक विशेषताओं और पुरानी बीमारियों पर आधारित होती हैं। इसके विपरीत एआई को आपकी व्यक्तिगत मेडिकल जानकारी का ज्ञान नहीं होता।
कभी-कभी एआई ऐसी जानकारी प्रदान कर सकता है, जो तकनीकी रूप से गलत हो सकती है लेकिन विश्वसनीय लगती है। चिकित्सा के क्षेत्र में दी गई गलत जानकारी खतरनाक हो सकती है और किसी की जान पर भारी पड़ सकती है।
एआई से परामर्श लेकर दवा लेने के संभावित गंभीर परिणाम:
1. गलत डायग्नोसिस : उदाहरण के लिए, अगर आपको सिरदर्द हो रहा है, तो एआई इसे सामान्य तनाव का परिणाम बता सकता है जबकि यह वास्तव में हाई ब्लड प्रेशर या किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी का संकेत हो सकता है। गलत सलाह की वजह से सही इलाज में देरी होने से स्थिति गंभीर हो सकती है।
2. दवाइयों का प्रतिक्रियात्मक प्रभाव : यदि आप पहले से ही किसी बीमारी की दवा ले रहे हैं और एआई ने अतिरिक्त दवा की सलाह दी, तो वह आपकी मौजूदा दवाइयों के साथ मिलकर गंभीर प्रतिक्रिया उत्पन्न कर सकती है, जिससे आपके किडनी या लिवर पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है।
3. एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस : बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स का उपयोग एक बड़ी समस्या बन चुकी है। अक्सर एआई संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक्स लेने का सुझाव दे सकता है। लेकिन इनके अनुचित उपयोग से शरीर में मौजूद बैक्टीरिया इतनी प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर सकते हैं कि भविष्य में वास्तव में ज़रूरत पड़ने पर ये दवाएं असर नहीं करेंगी।
मशीनें डेटा प्रदान कर सकती हैं, लेकिन इंसानी अनुभव को प्रतिस्थापित नहीं कर सकतीं। एक डॉक्टर आपके चेहरे की रंगत, आंखों की चमक और नब्ज देखकर जो समझ सकता है, उसे किसी भी एल्गोरिदम द्वारा समझा पाना नामुमकिन है। इसलिए अपनी सेहत को लेकर किसी भी तरह का जोखिम न लें। स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या के समाधान के लिए डॉक्टर से सलाह लें, न कि एआई पर निर्भर रहें।
