
उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बिजली क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव देख रहा है। 2026-27 के बजट में इस क्षेत्र को 65,926 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिससे ग्रामीण विद्युतीकरण और बिजली आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब गांवों में औसतन 20 घंटे की बिजली उपलब्ध हो रही है, जो खेती, छोटे उद्योगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा और गति दे रही है। यह कदम प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है।
2017 से पहले उत्तर प्रदेश, जो बिजली की गंभीर कमी और अंधेरे के लिए पहचाना जाता था, आज ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने ग्रामीण विद्युतीकरण को प्राथमिकता देते हुए हर घर तक बिजली पहुंचाने का अपना वादा पूरा कर लिया है। बजट 2026-27 में बिजली क्षेत्र के लिए प्रस्तावित 65,926 करोड़ रुपये की विशाल राशि इस दिशा में प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की ओर एक महत्वाकांक्षी कदम है।
गांवों में निर्बाध आपूर्ति और सुदृढ़ ढांचा
योगी सरकार ने बिजली आपूर्ति में सिर्फ पहुंच का विस्तार नहीं किया, बल्कि इसकी गुणवत्ता और समयबद्धता में भी ऐतिहासिक सुधार किए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 तक प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 20 घंटे, तहसील मुख्यालयों में 22 घंटे और जनपद मुख्यालयों में 24 घंटे निर्बाध बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इस बुनियादी ढांचे को और सुदृढ़ बनाने के लिए अप्रैल 2022 से अब तक 2,410 नए उपकेंद्र बनाए गए हैं और उनकी क्षमता में वृद्धि की गई है। इसके साथ ही, 1.06 लाख से अधिक ट्रांसफार्मरों की स्थापना और उन्नयन का कार्य भी सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।
योजनाओं का धरातल पर असर
प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) और दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के समन्वय से लाखों परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोशनी पहुंचाई गई है। संशोधित वितरण क्षेत्र सुधार योजना के अंतर्गत पुराने कंडक्टर्स को हटाकर एबी केबल स्थापित की जा रही हैं, साथ ही स्मार्ट मीटरिंग को भी लागू किया जा रहा है। इन प्रयासों से न केवल बिजली की चोरी को रोका गया है, बल्कि लो वोल्टेज जैसी पुरानी समस्या का भी समाधान हो चुका है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई ऊर्जा
बिजली की उपलब्धता ने खेती और स्थानीय रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। बेहतर बिजली सुविधा के चलते सिंचाई में सुधार हुआ है, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि हुई है। इसके साथ ही डेयरी, कोल्ड स्टोरेज और आटा चक्की जैसे छोटे उद्योगों को लगातार बिजली मिलने से ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य केंद्रों के विद्युतीकरण से गांवों में लोगों का जीवनस्तर भी बेहतर हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का यह सुदृढ़ बिजली ढांचा राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बनाएगा।
