
उत्तर प्रदेश में 2011 के बाद जनगणना प्रक्रिया एक बार फिर शुरू होने जा रही है। राज्य सरकार ने इसकी तैयारियों को गति दी है। इसके तहत 17 से 20 फरवरी के बीच 27 जिलों के मास्टर ट्रेनरों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। ये प्रशिक्षक आगे फील्ड कर्मियों को ट्रेनिंग देंगे। 20 मई से 20 जून तक डिजिटल मोबाइल ऐप की सहायता से घर-घर सर्वे कराया जाएगा, जिसमें नागरिकों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद जनगणना को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संपन्न करना है।
2011 के बाद एक बार फिर जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो रही है, जिसके लिए राज्य सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पहले चरण में प्रदेश के 27 जिलों से मास्टर ट्रेनरों को 17 फरवरी से 20 फरवरी तक विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये मास्टर ट्रेनर अपने जिलों में फील्ड पर काम करने वाले जनगणना कर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे। इसका उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और समय पर पूरा करना है। चुनिंदा 27 जिलों में आगरा, अलीगढ़, अमरोहा, बागपत, गाजियाबाद, बलिया, बिजनौर, बुलंदशहर, चंदौली, देवरिया, गौतम बुद्ध नगर, गाजीपुर, हापुड़, हाथरस, झांसी, ललितपुर, मथुरा, मऊ, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, रामपुर, सहारनपुर, संभल, शामली, सोनभद्र और वाराणसी शामिल हैं। पहले चरण में हाउसहोल्ड सर्वे होगा, जो 20 मई से 20 जून के बीच चलेगा। इस दौरान जनगणना कर्मी डिजिटल मोबाइल एप का उपयोग करते हुए घर-घर जाकर सर्वे करेंगे और 33 प्रश्नों पर आधारित जानकारी जुटाएंगे। सर्वे में भवन नंबर, परिवार क्रमांक, मुखिया का नाम, पेयजल की उपलब्धता, शौचालय की स्थिति, रसोई गैस का उपयोग, प्रमुख खाद्यान्न, परिवार की सुविधाएं और परिसंपत्तियों जैसी अहम जानकारी दर्ज की जाएगी। प्रशिक्षण सत्र के दौरान सर्वे प्रक्रिया, डाटा संकलन और तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि जनगणना का काम पारदर्शी तरीके से, बिना किसी त्रुटि के और तय समय सीमा के भीतर पूरा हो। दूसरे चरण में बाकी जिलों के मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षित किया जाएगा। लंबे समय बाद प्रदेश में शुरू हो रही यह जनगणना न केवल जनसंख्या संबंधी अद्यतन आंकड़े उपलब्ध कराएगी, बल्कि विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
