चक्रवात ‘मुरासु’ का बढ़ा खतरा: 110 KM से चलेंगी हवाएं, समुद्र में उठेंगी ऊंची लहरें, आंध्र से ओडिशा तक अलर्ट

Murasu
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गाल की खाड़ी में उठा चक्रवात मुरासु आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और तमिलनाडु में भारी बारिश होने की आशंका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने आंध्र प्रदेश और उत्तरी तमिलनाडु के तटीय इलाकों के लिए चक्रवात की चेतावनी जारी की है। आंध्र प्रदेश के पांच जिलों में अत्यंत भारी बारिश की आशंका को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह 28 अक्तूबर को बेहद गंभीर चक्रवात अर्नब ने आंध्र प्रदेश और यानम के तट पर दस्तक दी थी। तूफान से पहले और उसके दौरान आंध्र प्रदेश में 57 हजार से 84 हजार लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया था। शुरुआती आकलन के मुताबिक, चक्रवात से करीब 4,600 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। लाखों हेक्टेयर में धान और बागवानी की फसलें प्रभावित हुईं। सैकड़ों घर तबाह हुए और सड़क तथा बिजली व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा।

ओडिशा में भी चक्रवात के बाद हुई भारी बारिश से दक्षिणी जिलों गंजाम, गजपति और कंधमाल में अचानक बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हुईं। गिडिपाबाली गांव और पात्रापुर जैसे इलाकों में भी इसका असर देखा गया। अब कुछ ही दिनों बाद क्षेत्र एक और चक्रवात का सामना करने की तैयारी कर रहा है।

क्या है चक्रवात मुरासु?
चक्रवात मुरासु की शुरुआत दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव के क्षेत्र से हुई। रविवार, 1 नवंबर को यह चक्रवाती तूफान में बदल गया। भारत ने इसका नाम मुरासु रखा है। तमिल भाषा में मुरासु का अर्थ प्राचीन ढोल या ड्रम है। मौसम विभाग के मुताबिक, दो नवंबर को यह पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर गंभीर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया। सोमवार तड़के 2:30 बजे यह करीब 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा था। इसके दो नवंबर की आधी रात से तीन नवंबर की सुबह के शुरुआती घंटों के बीच नेल्लोर और नरसापुर के बीच आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट को पार करने की आशंका है। यह इलाका ओंगोल के आसपास पड़ता है।

चक्रवात मुरासु कितना खतरनाक होगा?
आईएमडी के पूर्वानुमान के मुताबिक तट से टकराते समय चक्रवात की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है। इस दौरान हवा के झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। तूफान के कारण आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में समुद्र में दो मीटर तक ऊंची लहरें उठने की आशंका है। इससे तटीय क्षेत्रों में समुद्र का पानी भरने का खतरा बढ़ सकता है। तटीय आंध्र प्रदेश में 24 घंटे के भीतर 115 से 200 मिलीमीटर से अधिक बारिश होने का अनुमान है।

ओडिशा में सोमवार शाम से 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। हवा के झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। तीन नवंबर को हवा की रफ्तार बढ़कर 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है और झोंकों की गति 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है। मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश के तट और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में तीन नवंबर की दोपहर तक जहाजों और मछली पकड़ने की गतिविधियों को पूरी तरह रोकने की सलाह दी है।

किन राज्यों और जिलों पर पड़ेगा असर?
आंध्र प्रदेश: राज्य के मध्य और दक्षिणी तटीय हिस्सों में चक्रवात का सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है। आईएमडी ने कृष्णा, गुंटूर, बापटला, प्रकाशम और एसपीएसआर नेल्लोर जिलों में अत्यंत भारी बारिश की आशंका को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया है। दो और तीन नवंबर को तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में भी भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। इन दो दिनों के दौरान तटीय इलाकों में 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

तेलंगाना: राज्य में दो से पांच नवंबर के बीच भारी से भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की आशंका है। खम्मम, नलगोंडा, सूर्यापेट, महबूबनगर, नागरकर्नूल और वनपर्थी के कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा जंगांव, यादाद्री भुवनगिरि, रंगारेड्डी, हैदराबाद और मेडचल-मलकाजगिरि में भी भारी बारिश का अनुमान है।

तीन नवंबर को खम्मम, सूर्यापेट और महबूबाबाद में बारिश हो सकती है। भद्राद्री कोठागुडेम, वारंगल और हनमकोंडा में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है। हवा के झोंके 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।

ओडिशा: दक्षिणी ओडिशा में दो से चार नवंबर के बीच भारी बारिश होने की आशंका है। दो नवंबर को कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है, जबकि तीन और चार नवंबर को दक्षिणी ओडिशा के कई हिस्सों में बहुत भारी बारिश का अनुमान है। दक्षिणी तटीय जिलों में भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ इलाकों में 7 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश होने का पूर्वानुमान है।

तमिलनाडु: आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहे चक्रवात को देखते हुए मौसम विभाग ने तमिलनाडु के कई जिलों में बारिश की चेतावनी जारी की है। चेन्नई और तिरुवल्लूर के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। चेंगलपट्टू, कांचीपुरम, रानीपेट, वेल्लोर और नीलगिरी में भी भारी बारिश का अनुमान है।

चक्रवात से निपटने के लिए राज्यों की क्या है तैयारी?

आंध्र प्रदेश: मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर चक्रवात मुरासु के संभावित असर और तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में बारिश और हवा की रफ्तार के पूर्वानुमान, जलाशयों में पानी के स्तर और एहतियाती उपायों पर चर्चा हुई। चक्रवात के खतरे को देखते हुए नायडू ने दो नवंबर को प्रस्तावित दिल्ली दौरा रद्द कर दिया। उन्होंने अधिकारियों को राहत और बचाव अभियान के लिए पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश दिया। विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश) में चक्रवात मुरासु के चलते सोमवार को गन्नवरम एयरपोर्ट से संचालित होने वाली इंडिगो की 10 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। एयरपोर्ट अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी।

राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने संभावित प्रभावित जिलों में 1,688 मेडिकल टीमों को तैनात किया है और 116 राहत शिविर तैयार रखे हैं। विभाग ने 13,165 आपातकालीन बिस्तरों की व्यवस्था की है। इसके अलावा जरूरी दवाओं और सांप के काटने पर इस्तेमाल होने वाले एंटी-स्नेक वेनम के 43,672 इंजेक्शन का भंडार रखा गया है। आपातकालीन सेवा 108 की 733 एंबुलेंस, 102 सेवा के तहत 300 थल्ली बिड्डा एक्सप्रेस वाहन और 104 सेवा की 721 मोबाइल मेडिकल यूनिट को तैयार रखा गया है।

ओडिशा: राज्य सरकार ने दक्षिणी जिलों में हाई अलर्ट जारी किया है। निचले इलाकों और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। ब्लॉक विकास अधिकारियों और तहसीलदारों को विस्तृत माइक्रो-प्लान तैयार करने और जोखिम वाले इलाकों के लोगों को सुरक्षित आश्रय स्थलों तक पहुंचाने को कहा गया है।

सरकार ने मछुआरों को दो से चार नवंबर के बीच समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है। संवेदनशील इलाकों में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल की टीमें तैयार रखी गई हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भुवनेश्वर स्थित राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र में उच्चस्तरीय बैठक कर तैयारियों और एहतियाती उपायों की समीक्षा की।

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