
– एक चिकित्सक होने के नाते स्ट्राजेनेका वैक्सीन कंट्रोवर्सी से वह काफी व्यथित हैं डॉ. शुक्ला
साल 2015 के बाद न्यूरोसिस्टीसरकोसिस (दिमाग में कीड़ा) के मामलों में साल दर साल भारी गिरावट दर्ज की गई है। ये खुलासा कानपुर के मशहूर न्यूरोसर्जन डॉ. विकास शुक्ला और उनकी टीम के द्वारा किए गए एक अध्ययन में हुआ है। द पनेशिया मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, काकादेव-कानपुर में शुक्रवार को आयोजित एक पत्रकारवार्ता के दौरान डॉ. शुक्ला ने कहा कि साल 2008 से मिर्गी के मरीजों पर हमारी स्टडी चल रही थी जो कि साल 2024 में जाकर लगभग पूरी हो चुकी है। हमारे पास एक सिग्निफिकेंट डाटा है साल 2015 के आसपास ग्रामीण इलाकों में न्यूरोसिस्टीसरकोसिस (दिमाग में कीड़ा ) का। साल 2015 में बड़ी संख्या में शौचालय बनने से और एक नल से साफ पानी आने की वजह से न्यूरोसिस्टीसरकोसिस के केसेस काफी कम हुए हैं। इस बीमारी के कम होने से लाखों लोगों को फायदा मिला है।
वहीं प्रेस वार्ता में वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीती शुक्ला ने कहा कि ओपन फील्ड डेफिकेशन यानि कि खुले में शौच की वजह से 2015 से पहले सलाद खाने की वजह से न्यूरोसिस्टीसरकोसिस के केस काफी ज्यादा थे। क्योंकि सलाद गांवों में किनारे ही उगाया जाता है जैसे कि- धनियां और प्याज। बाहर बिकने वाली फास्टफूड की दुकानों मे बिना धुले ही इन सब्जियों को ग्राहकों के सामने परोसा जाना आज भी आम बात ही है। केवल यही नहीं ग्रामीण इलाकों में खुले में शौच की वजह से न्यूरोसिस्टीसरकोसिस की घटनाएं बढ़ीं करीब एक दशक पहले केंद्र सरकार के नेतृत्व में सफाई अभियान तेजी से चला जिसकी वजह से गांव एवं शहरी इलाकों में भी खुले में शौच पर बड़े पैमाने पर पाबंदी लगी। नल के द्वारा स्वच्छ जल आपूर्ति के कारण लोगों को साफ पानी मिलना शुरू हुआ था।
वहीं प्रेसवार्ता में कोविशील्ड विवाद पर पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल पर डॉ. विकास शुक्ला ने कहा कि एक चिकित्सक होने के नाते स्ट्राजेनेका वैक्सीन कंट्रोवर्सी से वह काफी व्यथित हैं। भारतीय कोरोना वैक्सीन को लेकर सकारात्मक पक्ष देशवासियों के सामने आना बहुत जरूरी है।
विपक्ष बिना कुछ सोचे समझे कुतर्क करते हुए केंद्र की मोदी सरकार को बदनाम करने की साजिश कर रहा है। किसी के द्वारा किए हुए अच्छे कामों की गलत धारणा बनाकर लोगों को भ्रमित करना उचित नहीं है, यह देशहित में कतई नहीं है। सरकार के प्रभावी ढंग से उठाये गए कदम पर कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है। भाजपा सरकार को बदनाम करने की साजिश के तहत कोरोना वैक्सीन के दुष्प्रभावों का कुप्रचार कर षड़यंत्र रचा जा रहा है। पत्रकारवार्ता में डॉ. योगेश मिश्रा एवं डॉ. अनिल दीक्षित भी मौजूद रहे।
