
झांसी के मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर महानिदेशक के आने से पहले परिजन के लिए व्यवस्थाएं करा दी गई। अब वार्ड नंबर पांच की एसएनसीयू के बाहर गैलरी में परिजन के लिए छोटे पलंग बिछवा दिए। पानी के कैंपर भी रखवा दिए।
झांसी के मेडिकल कॉलेज में आग लगने के मामले में चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक के जांच के लिए पहुंचने से एक घंटे पहले वार्ड नंबर पांच की एसएनसीयू के बाहर गैलरी में परिजन के लिए छोटे पलंग बिछवा दिए। पानी के लिए भटक रहे तीमारदारों के लिए कैंपर भी रखवा दिए। अचानक व्यवस्थाएं होती देख परिजन हैरान रह गए।
इससे पहले हादसे के बाद उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आने की सूचना के बाद मेडिकल कॉलेज में चूना छिड़कवाया जा रहा था। सोशल मीडिया पर इसकी खूब आलोचना हुई थी। खुद उपमुख्यमंत्री को कार्रवाई के लिए कहना पड़ा था। ऐसे में लोग सवाल उठा रहे हैं कि 12 मासूम मेडिकल प्रशासन की लापरवाही की भेंट चढ़ गए और अब जांच के दौरान दिखावा ज्यादा किया जा रहा है।
झांसी के मेडिकल कॉलेज में आग लगने के मामले में चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक के जांच के लिए पहुंचने से एक घंटे पहले वार्ड नंबर पांच की एसएनसीयू के बाहर गैलरी में परिजन के लिए छोटे पलंग बिछवा दिए। पानी के लिए भटक रहे तीमारदारों के लिए कैंपर भी रखवा दिए। अचानक व्यवस्थाएं होती देख परिजन हैरान रह गए।
इससे पहले हादसे के बाद उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आने की सूचना के बाद मेडिकल कॉलेज में चूना छिड़कवाया जा रहा था। सोशल मीडिया पर इसकी खूब आलोचना हुई थी। खुद उपमुख्यमंत्री को कार्रवाई के लिए कहना पड़ा था। ऐसे में लोग सवाल उठा रहे हैं कि 12 मासूम मेडिकल प्रशासन की लापरवाही की भेंट चढ़ गए और अब जांच के दौरान दिखावा ज्यादा किया जा रहा है।
शुक्रवार की रात एसएनसीयू में आग लगने के बाद भर्ती नवजात शिशुओं को इमरजेंसी के बाल रोग विभाग में भर्ती किया गया। जब उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के सुबह पांच बजे तक मेडिकल कॉलेज आने की सूचना मिली तो कॉलेज प्रशासन ने सिर्फ चार घंटे में वार्ड नंबर पांच में एसएनसीयू चालू कर बच्चों को भर्ती करवा दिया। भर्ती शिशुओं के माता-पिता व परिजन बाहर जमीन पर बैठकर रात गुजारते रहे मगर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया।
सोमवार को सुबह चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक किंजल सिंह के आने से पहले उससे एक घंटा पहले कॉलेज प्रशासन ने वार्ड नंबर 5 में बनी एसएनसीयू के बाहर व्यवस्थाएं दुरुस्त करवा दीं। भर्ती शिशुओं के माता-पिता और परिजन के छोटे पलंग बिछवा दिए गए। यही नहीं, प्यास बुझाने के लिए छह कैंपर भी रखवा दिए। यह व्यवस्थाएं देख सभी समझ गए कि कोई न कोई अधिकारी आ रहा है।
शनिवार व रविवार की रात जमीन पर लेटकर काटी है। सुबह करीब नौ बजे कुछ लोग आए और आराम करने के लिए पलंग बिछाकर चले गए हैं।
निरीक्षण करने के लिए अधिकारी आ रहे थे, उससे करीब एक घंटा पहले ही आराम करने लिए पलंग बिछवाया है। पानी के कैंपर भी रखवा दिए हैं।
रात ठंडी जमीन पर लेटकर गुजारी है। पानी के लिए दो मंजिल उतरकर आना-जाना पड़ रहा था। सुबह अचानक सारी व्यवस्थाएं बदल दी गई है।
टीम को जांच के लिए करना पड़ा इंतजार
लखनऊ से आई टीम सीधे घटना स्थल एसएनसीयू पहुंची, जहां ताला लगा हुआ था। टीम और कॉलेज प्रशासन चाबी आने के इंतजार में खड़ा रहा। इस पर चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक किंजल सिंह ने प्राचार्य से तल्ख तेवर में कहा ‘प्लान करके नहीं रखा था। सुबह से फोन पर बात कर रहे थे’। करीब पांच मिनट बाद ताला खुला तब टीम जांच करने अंदर गई।
टीम के निरीक्षण के दौरान चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक से कुछ लोगों ने सीएमएस की मनमानी की शिकायत की। इस पर महानिदेशक ने सीएमएस डॉ. सचिन माहुर को तलब किया और काफी देर तक पूछताछ की।
चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक ने बताया कि शॉर्ट सर्किट की वजह पता करने के लिए बिजली विभाग की टीम भी जांच करेगी। पता किया जाएगा कि कहीं क्षमता से ज्यादा लोड तो नहीं था। जिन बिजली के उपकरणों को लगाया गया, उनकी क्षमता और गुणवत्ता सही थी या नहीं?
कड़ी से कड़ी जोड़कर बनाई रिपोर्ट शासन को सौंपेगी टीम
मेडिकल कॉलेज की एनएसनसीयू में लगी आग की जांच करने लखनऊ से आई टीम ने हर एक से अलग-अलग बात की। सभी की न सिर्फ वीडियोग्राफी की बल्कि लिखित बयान भी दर्ज किए। करीब पांच घंटे बाद कॉलेज प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर से टीम ने पूरी व्यवस्था के बारे में पूछते हुए प्रशासनिक व्यवस्था भी पूछीं। आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि मंगलवार को टीम फिर मेडिकल कॉलेज जाएगी और जांच करेगी। इसके बाद कड़ी से कड़ी जोड़कर रिपोर्ट तैयार करके शासन को सौंपेगी।
प्राचार्य ने झाड़ा पल्ला, बोले-चूने के लिए किसी से नहीं कहा
उप मुख्यमंत्री के आगमन से पहले इमरजेंसी और वार्डों की तरफ जाने वाले रास्ते पर चूना छिड़काव के मामले में कॉलेज प्रशासन ने पल्ला झाड़ लिया है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आने से पहले परिसर में चूने का छिड़काव करवा दिया गया। इस पर उपमुख्यमंत्री ने नाराजगी जाहिर करते हुए चूने का छिड़काव कराने वाले पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इस मामले में अभी तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई है। इस संबंध में प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि एसआईसी डॉ. सुनीता भदौरिया और सीएमएस डॉ. सचिन माहुर ने कहा है कि उन्होंने किसी से भी चूने का छिड़काव करने के लिए नहीं कहा है। चूंकि परिसर में सफाई का कार्य एजेंसी के माध्यम से किया जाता है और जब कोई वीआईपी आता है, तो चूने का छिड़काव होता है। संभव है कि एजेंसी के कर्मियों ने उप मुख्यमंत्री के आने से पहले इसी मंशा से छिड़काव कर दिया हो।
वार्ड में भर्ती तीन नवजातों की हालत नाजुक
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में हुए अग्निकांड से बचाए गए एक और बच्चे की सोमवार को मौत हो गई। इसके साथ ही मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है। जबकि, तीन बच्चों की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। मेडिकल कॉलेज के नवजात शिशु गहन चिकित्सा केंद्र (एसएनसीयू) में शुक्रवार की रात भीषण आग लग गई थी। हादसे के वक्त वार्ड में 49 बच्चे भर्ती थे। इनमें से 10 की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि बाकी बच्चों को बचा लिया गया था। बचाए गए एक बच्चे ने रविवार को दम तोड़ दिया था, जबकि सोमवार को एक और बच्चे की सांसों की डोर थम गई। हादसे से बचाए गए तीन अन्य बच्चों की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। उनका मेडिकल कॉलेज में इलाज जारी है।
झांसी मेडिकल कॉलेज को जल्द मिल सकता है स्थायी प्राचार्य
चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक ने महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य की जल्द ही स्थायी तैनाती के संकेत दिए हैं। उन्होंने बताया कि आयोग को प्रस्ताव भेजा है और जल्द चयन की प्रक्रिया पूरी होगी।
मेडिकल कॉलेज में काफी समय से स्थायी प्राचार्य की तैनाती नहीं हुई है। पूर्व में शासन ने डॉ. आरसी लाल की तैनाती की थी मगर उन्होंने पदभार नहीं संभाला। इसके बाद फिर प्राचार्य की तैनाती की गई, जो 15 दिन काम करने के बाद चले गए। तब से कार्यवाहक प्राचार्य के माध्यम से ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। सोमवार को महानिदेशक से जब स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति के बाबत पूछा तो उन्होंने कहा आयोग को प्रस्ताव भेजा है। आयोग के माध्यम से जल्द चयन की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी।
