
लखनऊ के रहमानखेड़ा में आतंक का पर्यान बने बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग ने दुधवा से मदद मांगी है। दुधवा से हथिनी सुलोचना और डायना को लखनऊ भेजा गया है।
लखनऊ के रहमानखेड़ा में बीते 25 दिनों से बाघ की दहशत है। बाघ वनरोज समेत कई पशुओं का शिकार कर चुका है। इलाके में आतंक का पर्याय बने बाघ को पकड़ने के लिए लखीमपुर खीरी के दुधवा नेशनल पार्क से हाथिनी सुलोचना और डायना को लखनऊ भेजा गया है। हथिनी सुलोचना के साथ उसके महावत मोहम्मद अयूब खान, चारा कटर इस्तियाक को भेजा गया है जबकि डायना के साथ महावत महताब और चारा कटर राहुल गए हैं।
बताया गया है कि हाथिनी सुलोचना और डायना की मदद से वन विभाग की टीम बाघ को पकड़ने के लिए अभियान चलाएगी। इस संबंध में दुधवा के डीडी डॉ रंगाराजू टी ने बताया कि लखनऊ रेंज से वार्डन द्वारा दुधवा से रेस्क्यू के लिए हाथियों की डिमांड की गई थी, जिसके बाद उच्चाधिकारियों से बात करने के बाद दुधवा से हथिनी डायना और सुलोचना को महावतों के साथ लखनऊ वाहन के जरिए रवाना किया गया है।
रहमानखेड़ा इलाके में है बाघ
लखनऊ के रहमानखेड़ा इलाके में बाघ आतंक का पर्याय बना हुआ है। खेतों और बागों में उसके पगचन्हि देखे गए हैं। वन विभाग की टीमें बाघ को पकड़ने में नाकाम साबित हो रही हैं। शुक्रवार को भटऊ जमालपुर और शाहपुर गांव में बाघ की दहाड़ सुनकर खेतों में पानी लगा रहे किसानों ने भागकर अपनी जान बचाई। लहसुन और सरसों के खेतों में मिले बाघ के पगचिह्नों की जांच में बाघ के मौजूदगी की पुष्टि हुई। जानकारी के मुताबिक इलाके में थर्मल ड्रोन कैमरों से भी नजर रखी जा रही है।
