निठारी कांड: 18 साल बीते..सवाल फिर वही, आखिर गुनहगार कौन? परिजन बोले- बेटी रही न पैसा; इंसाफ की उम्मीद भी खत्म

Nithari Case
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देश के बहुचर्चित निठारी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद आदेश के अनुपालन में विशेष सीबीआई कोर्ट ने रिहाई परवाना जारी कर दिया। इसके बाद उसे गौतमबुद्धनगर के लुक्सर जेल से मुक्त कर दिया गया।

नोएडा के निठारी गांव की गलियों में आज भी सन्नाटा बोलता है। वही निठारी, जिसने कभी देश को हिला देने वाला कांड देखा था। निठारी की कोठी नंबर डी-5 में रहने वाले मोनिंदर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली पर बच्चों की बेरहमी से हत्या और अवशेष को घर के पीछे दफनाने का आरोप था। अब जब दोनों को कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, तो एक बार फिर उस दर्दनाक याद ने गांव में सन्नाटा फैला दिया है। उन घरों में जहां कभी बच्चों की खिलखिलाहट गूंजती थी, अब सिर्फ दर्द की परछाइयां बची हैं।

मेरी बेटी का इंसाफ अब ऊपर वाला करेगा
निठारी में उन्नाव से आकर रह रहे झब्बू लाल मिलते हैं। चेहरे पर वक्त की मार और आंखों में एक सवाल लिए अमर उजाला से बात करते हुए उन्होंने कहा “क्या मोनिंदर का 18 साल तक जेल में रहन झूठ था” बीस साल पहले झब्बू लाल की दस साल की बेटी ज्योति अचानक लापता हो गई थी। बाद में उसका नाम भी उन बच्चों की लिस्ट में शामिल हुआ, जो कभी लौटे नहीं।

अब वह निठारी की एक कोठी के पीछे वाली गली में प्रेस की दुकान चलाते हैं। कहते हैं मेरी मासूम बेटी ज्योति डॉक्टर बनना चाहती थी। वह पढ़ाई में भी अपने भाई बहनों में सबसे होशियार थी। लेकिन इन दरिंदों ने उसे मार डाला। अगर वो निर्दोष थे, तो फिर मेरी बच्ची कहां गई? मेरी बेटी के गायब होने के करीब एक साल तीन महीने बाद हमको पता चला कि मोनिंदर ने उसे मारा है।
मैंने खुद अपने हाथों से कटे सिर उस कोठी से बाहर निकाले हैं। यह वहां मौजूद सभी ने देखा है। पहले मुझे भरोसा था कि मेरी बेटी को इंसाफ मिलेगा पर अब कुछ नहीं बचा न बेटी रही न पैसा न ही इंसाफ मिलने की उम्मीद।

बेटा खोने के बाद से नहीं रही उम्मीद
निठारी में रहने वाले किशन लाल और उनकी पत्नी पूनम का तीन साल तीन महीने का बेटा हर्ष खेलते-खेलते अचानक गायब हो गया था। परिवार ने उसे हर जगह ढूंढा, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। बाद में उनका नाम निठारी कांड से जुड़ा मिला।

मां पूनम की आंखें आज भी बेटे की याद में नम हो जाती हैं। वह कहती हैं, बेटा अब 23-24 साल का होता। शुरू में नेता और अधिकारी आते थे, कोर्ट से उम्मीदें थीं, लेकिन अब सब खामोश हैं। पूनम ने थककर कहा, अब हम इंसाफ की उम्मीद छोड़ चुके हैं।

निठारी मामले में कब कैसे क्या हुआ?
-2005-2006 : नोएडा के निठारी गांव से कई बच्चे और महिलाएं लापता होने लगे।
-दिसंबर 2006 : पुलिस ने कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली के घर के पास से हड्डियां और शरीर के अंग बरामद किए।
-2007 : मामला सीबीआई को सौंपा गया। कोली ने पूछताछ में कई बच्चों की हत्या करने की बात कबूल की।
-2009-2011 : सीबीआई की विशेष अदालत ने कोली को कई मामलों में फांसी और पंढेर को उम्रकैद की सजा दी।
-2014-2015 : सुप्रीम कोर्ट ने कोली की मौत की सजा को उम्रकैद में बदला।
-अक्तूबर 2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों को 12 मामलों में बरी कर दिया, साक्ष्य कमजोर पाए गए।
-जुलाई 2025: पंढेर अंतिम मामले में बरी होकर जेल से बाहर आया।
-नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को भी दोषमुक्त कर दिया।

जेल से बाहर आया सुरेंद्र कोली
देश के बहुचर्चित निठारी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद आदेश के अनुपालन में विशेष सीबीआई कोर्ट ने रिहाई परवाना जारी कर दिया। इसके बाद उसे गौतमबुद्धनगर के लुक्सर जेल से मुक्त कर दिया गया।

निठारी कांड में सीबीआई अदालत में सबसे पहले 13 फरवरी 2009 को पहला फैसला सुनाया गया था। जिसमें सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को सजा-ए-मौत की सुनाई थी। इस मामले में सुरेंद्र कोली ने अपने इकबालिया बयान में अपराध कुबूल किया था।

सीबीआई के वकील ने दलील दी थी कि महिला की हत्या करने के बाद उसके साथ दुष्कर्म की कोशिश की थी। फिर चाकू से काटकर उसके बाजू और सीने का मांस भी खाया था। इसमें मोनिंदर सिंह को भी भागीदार बताया था। अदालत ने इसे घिनौना अपराध मानते हुए सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को मौत की सजा सुनाई थी।

रातोंरात टली थी फांसी
सुरेंद्र कोली को नौ सितंबर (रविवार) 2014 मेरठ जेल में फांसी दी जानी थी। कोली को मेरठ जेल की एक हाई सिक्योरिटी बैरक में रखा गया था। फांसी की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी थी। रविवार को अदालत बंद होने से अधिवक्ता इंदिरा जय सिंह ने रात को ही सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा से मिलने का समय मांगा था। रात को करीब 11:45 बजे वरिष्ठ मुख्य न्यायमूर्ति एचएल दत्तू के घर विशेष अदालत लगी।

रात में ही बहस हुई। कैलेंडर की तारीख बदल गई। उस समय रात को एक बजने से कुछ समय पहले ही विशेष अदालत ने अपना फैसला सुनाया। अपने फैसले में अदालत ने सुरेंद्र कोली के मामले में दोबारा सुनवाई के लिए इंदिरा जय सिंह को एक सप्ताह का समय देते हुए सुरेंद्र कोली की फांसी पर रोक लगा दी। सबसे पहले फोन करके मेरठ के डीएम और एसएसपी को इस फैसले की जानकारी दी गई। सुरेंद्र कोली की फांसी को अगले सप्ताह तक रोके जाने की जानकारी दी गई। इसके साथ ही उन्हें अदालत के आदेश की लिखित कापी मिलने तक इंतजार करने को कहा गया।
19 मामले में 15 साल तक चली सुनवाई
– विशेष सीबीआई कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को 13 मामलों में सुनाई फांसी की सजा और तीन मामलों में बरी किया।
– मोनिंदर सिंह पंधेर को दो मामले में फांसी, एक में सात साल कारावास और चार मामलों में बरी किया।
– 22 मई 2007 – सीबीआई ने अदालत में पहला आरोप पत्र दाखिल किया
-13 फरवरी 2009 – रिंपा हलदर हत्याकांड में सुरेंद्र कोली व मोनिंदर पंधेर को सजा-ए-मौत। हाईकोर्ट से पंधेर बरी।
-12 मई 2010 -आरती हत्याकांड में सुरेंद्र कोली -सजा-ए-मौत।
-28 अक्तूबर 2010 – रचनालाल हत्याकांड में सुरेंद्र कोली – सजा-ए-मौत।
-22 दिसंबर 2010 – दीपाली हत्याकांड में सुरेंद्र कोली – सजा-ए-मौत।
-24 दिसंबर 2012 – सुरेंद्र कोली – सजा-ए-मौत।
-7 अक्तूबर 2016 – सुरेंद्र कोली – सजा-ए-मौत।
-16 दिसंबर 2016 – सुरेंद्र कोली -सजा-ए-मौत।
-24 जुलाई 2017 – कोली को सजा-ए-मौत, पंधेर बरी।
-8 दिसंबर 2017 – दोनों को सजा-ए-मौत।
-2 मार्च 2019 – कोली को सजा-ए-मौत- पंधेर बरी।
-6 अप्रैल 2019 – कोली को सजा-ए-मौत – पंधेर बरी।
-16 जनवरी 2021- सुरेंद्र कोली – फांसी।
-26 मार्च 2021 -सुरेंद कोली बरी।
-सात जनवरी 2022 – सुरेंद्र कोली बरी।
-22 जनवरी 2022 – सुरेंद्र कोली बरी।
-19 मई को सुरेंद्र कोली को सजा-ए-मौत और मोनिंदर पंधेर को देह व्यापार में सात साल की सजा।

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