
कानपुर में चर्चित लैंबोर्गिनी कार हादसे के मामले में आरोपी तंबाकू व्यापारी के बेटे शिवम मिश्रा को कोर्ट ने 20 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा कर दिया। एसीजेएम–7 अमित सिंह की अदालत ने शिवम मिश्रा को न्यायिक हिरासत में लेने की पुलिस की याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने शिवम मिश्रा को गलत तरीके से गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया है।
एसीजेएम 7 अमित सिंह की अदालत ने तंबाकू व्यापारी के बेटे शिवम मिश्रा को न्यायिक हिरासत में लेने की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने टिप्पणी की कि पुलिस ने शिवम मिश्र को गलत तरीके से गिरफ्तार किया है और इसके लिए जांच अधिकारी को फटकार लगाई। अदालत ने शिवम को 20,000 रुपये के निजी बांड पर रिहा कर दिया। ग्वालटोली थाना पुलिस ने गुरुवार सुबह शिवम को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। मामला लैंबोर्गिनी कार के साथ हुए हादसे से जुड़ा था, जिसमें पुलिस का नोटिस न लेने और जांच प्रक्रिया में सहयोग न करने का आरोप लगाया गया था। रविवार को वीआईपी रोड पर तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम की लैंबोर्गिनी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिससे तौफीक घायल हो गया। घायल की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। इस बीच, सोमवार को कार चालक मोहन एम, जो दिल्ली के द्वारका का निवासी है, ने अदालत में सरेंडर करने का अनुरोध पत्र दाखिल किया।
वसंत विहार, साउथ वेस्ट दिल्ली के निवासी और कार मालिक शिवम मिश्रा ने कोर्ट में अपनी कार की रिहाई के लिए प्रार्थना पत्र दायर किया था। बुधवार को इस मामले में दोनों प्रार्थनापत्रों पर सुनवाई हुई। कार चालक ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया था। पुलिस ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि मोहन एम इस मामले में आरोपित नहीं है।
इस प्रकरण में मुख्य वांछित व्यक्ति शिवम मिश्रा है। कार की रिहाई को लेकर पुलिस ने यह जानकारी दी कि शिवम मिश्रा ने अब तक जांच अधिकारी को कार के दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं। इसी आधार पर कोर्ट ने चालक द्वारा दायर आत्मसमर्पण का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।
