
अलीगढ़ में मंगलवार की दोपहर करीब दो बजे खैर कोतवाली में हेमलता जिंदा जलकर मर गई। आग की लपटों से घिरी महिला कोतवाली परिसर में इधर-उधर दौड़ती रही। लेकिन विभाग के आला अधिकारी पुलिस वालों पर कार्रवाई करने की बजाए शुरूआत से ही उन्हें बचाने में जुटे हैं। कभी आग की लपटों में घिरी महिला का वीडियो जारी किया तो कभी सीसीटीवी फुटेज। लेकिन इस पर किसी का ध्यान नहीं गया कि जो भी हुआ वह है तो पुलिस की गंभीर लापरवाही का ही नतीजा। हेमलता के परिवार वाले चीख चीखकर कह रहे थे कि दरोगा कार्रवाई के नाम पर पैसे मांग रहा था।
मंगलवार को रोंगटे खड़े कर देने वाली यह घटना खैर कोतवाली में हुई थी। मुकदमा दर्ज होने के बाद भी ससुरालियों पर कार्रवाई न होने से नाराज गांव दरकन नगरिया निवासी हेमलता (50) पुलिस के बुलावे पर ही कोतवाली गई थी। पुलिस ने उसके रिश्ते के जेठ चंद्रभान को भी बुलाया हुआ था। हेमलता का आरोप था कि चंद्रभान ने उसका मकान कब्जा लिया है।
11 जून को हेमलता ने चंद्रभान और उसके बेटों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया था। मगर पुलिस कुछ कर नहीं रही थी। उल्टे उस पर ही समझौते का दबाव बना रही थी। मंगलवार को भी यही हुआ। चंद्रभान अपनी शर्तों पर समझौता करना चाहता था, जिसके लिए हेमलता तैयार नहीं हुई। हेमलता कोतवाली से बाहर चली गई।
कुछ देर बाद वह शोर मचाते हुए फिर कोतवाली में पहुंची और अपने ऊपर पेट्रोल डाल लिया। हेमलता का बेटा गौरव भी साथ में था। हेमलता ने हाथ में लाइटर भी पकड़ा था। इसी दौरान एक दरोगा दौड़कर पहुंचा और लाइटर उसके हाथ से छीना जो जमीन पर गिर गया।
अचानक से हेमलता आग की लपटों में घिर गई। पुलिस का कहना है कि हेमलता के बेटे गौरव ने जमीन पर गिरे लाइटर को जैसे ही उठाया वह जल गया और पेट्रोल से भीगे हेमलता के बदन ने आग पकड़ ली। बुरी तरह झुलसी महिला की अस्पताल में मौत हो गई। महिला की मौत होते ही पुलिस वाले घबरा गए।
पुलिस वालों ने खुद को बचाने के लिए सबसे पहले कोतवाली में आग की लपटों से घिरी हेमलता का वीडियो जारी कर दिया। बाद में कोतवाली में लगे सीसीटीवी की फुटेज जारी की। जिसमें हेमलता के साथ उसका बेटा तो दिख रहा है लेकिन जिस तरह से पुलिस कह रही है कि गौरव ने ही आग लगाई थी ऐसा कहीं प्रतीत नहीं हुआ।
खैर यहां हेमलता के कोतवाली में आत्मदाह या फिर बेटे द्वारा अचानक जलाए गए लाइटर से हेमलता के शरीर में आग लगने की वजह सामने आ रही है। लेकिन सोचने की बात तो यह है कि जिम्मेदार तो पुलिस ही है।
अगर पुलिस ने मुकदमा दर्ज होने के बाद ससुरालियों पर कार्रवाई की होती या जिस तरह से हेमलता के परिवार वाले दरोगा पर आरोप लगा रहे हैं कि वह कार्रवाई के नाम पर पैसे मांग रहा था, उस पर एक्शन हुआ होता तो हेमलता कोतवाली जाती ही क्यों। लेकिन आला अधिकारी पुलिस वालों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। जिससे भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
खैर पुलिस की भूमिका पर ये उठ रहे सवाल
– 11 जून की घटना में धाराएं घटाकर चार्जशीट लगाई तो महिला संतुष्ट क्यों नहीं।
– पांच दिन पुरानी घटना में महिला ने शिकायत दी तो जांच या कार्रवाई क्यों नहीं।
– समाधान दिवस में मध्यस्थता के प्रयास हुए तो फिर कल थाने पर महिला क्यों बुलाई।
– कोतवाल व विपक्षी से महिला नोकझोंक कर रही थी, मगर उसे संतुष्ट नहीं किया गया।
– कोतवाल के सामने महिला आत्मदाह की धमकी देते हुए निकली, रोका क्यों न था।
– महिला-उसका बेटा पेट्रोल लेकर आ गए, इसके बाद यह घटना हुई, भनक नहीं।
एसएसपी संजीव सुमन का कहना है कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। परिवार वालों से भी कई दफा पूछा जा चुका है कि उन्हें किसी पुलिस कर्मी से कोई शिकायत तो नहीं है। परिवार वाले बार बार यही कह रहे हैं कि पुलिस तो शुरूआत से ही उनका सहयोग कर रही थी। लेकिन फिर भी अगर किसी की लापरवाही सामने आती तो एक्शन होगा।
