
कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पांच मंजिला परीक्षा भवन की छत पर बने डक्ट से गिरकर मरने से पहले डॉ दीक्षा तिवारी अपने दोस्तों डॉ हिमांशु और डॉ मयंक सिंह को पुलिस ने छोड़ दिया है। हालांकि दोनों को पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर हाजिर होने और शहर से बाहर न जाने के लिए कहा गया है।
एडिशनल पुलिस कमिश्नर हरीश चंदर ने बताया कि अभी तक डॉ. दीक्षा के परिजनों ने कोई तहरीर नहीं दी है। दीक्षा को बचाने की कोशिश में घायल हिमांशु को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जबकि मयंक को घर भेज दिया गया है
दरअसल, अबतक की पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि कॉलेज और शहर छोड़ने से पहले तीनों एक बार फिर से अपनी यादें संजोना चाहते थे। इसीलिए तीनों ऑडिटोरियम की दीवार फांदकर परिसर में दाखिल हुए। मेडिकल कालेज परिसर में स्थित बैंक, पोस्ट ऑफिस और एटीएम के बाहर लगे कैमरों में भी तीनों की पैदल जाते हुए फोटो कैद हुई।
फुटेज में भी दीक्षा हिमांशु का हाथ पकड़े और कंधे पर सिर रखकर आगे बढ़ रही है, जबकि मयंक पीछे चलता दिखाई दिया। वहीं फॉरेंसिक रिपोर्ट में मिले साक्ष्य पहले ही हादसे की ओर इशारा कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस अब फॉरेंसिक रिपोर्ट, डॉक्टरों के बयान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को जांच रही है।
अचानक टूटा डक्ट का पत्थर और वो गिर गई
पूछताछ के दौरान हिमांशु और मयंक ने बताया कि तीनों परिसर में दाखिल होकर छत पर पहुंचे। वहां हिमांशु डक्ट के किनारे बैठा था। दीक्षा ने पास में बैठने की जिद की तो हिमांशु ने सहारा देकर दीक्षा को डक्ट पर बैठने में मदद की। जैसे ही दीक्षा बैठी, डक्ट का पत्थर नीचे गिर गया और उसी के साथ दीक्षा भी नीचे गिर गया। हिमांशु ने बताया कि वह तुरंत ही दीक्षा को बचाने के लिए डक्ट के डाउन पाइप को पकड़कर नीचे उतरने लगा और इसी दौरान जख्मी हो गया। मयंक ने बताया कि उन्होंने सीपीआर देकर पुलिस को डायल 112 पर सूचना दी और फिर दीक्षा को हैलट ले गए।
सुरक्षा बढ़ाने के लिए लिखा पत्र
घटना के सामने आने के बाद पुलिस ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में कॉलेज प्रबंधन को पत्र लिखा गया है। साथ ही जांच पूरी होने तक इमारत को सील कर बाहर से लॉक कर दिया गया है।
पूर्व छात्रा मौत मामले में मेडिकल कॉलेज ने गठित की कमेटी
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को परीक्षा भवन से गिरकर हुई डॉ. दीक्षा तिवारी की मौत के मामले में मेडिकल कॉलेज ने कमेटी गठित कर दी है। कमेटी में डॉ. लुबना खान, डॉ. जीडी यादव और डॉ. यशवंत राव शामिल हैं।
कमेटी जांच करेगी कि इतनी रात में तीनों डॉक्टर बिना अनुमति अंदर क्यों और कैसे आए। उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरी ने बताया कि टीम हर बिंदु पर जांच करेगी और उसके बाद रिपोर्ट सौंपेगी। इसी के बाद आगे कार्रवाई होगी।
कमेटी के सदस्य डॉ यशवंत राव ने बताया कि जांच के लिए पांच दिन का समय गया है। इस दौरान यह भी देखा जाएगा कि मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा में कैसे चूक हुई, कैसे वे तीनों कैंपस के अंदर आए।
