Kargil- जम्मू में बढ़ते आतंकी हमलों के बीच पीएम मोदी का पाकिस्तान को कड़ा संदेश, गहरे हैं इसके सियासी संदेश

P M Modi
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लंबे समय से पाकिस्तान के नापाक इरादों पर चुप्पी साधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जमकर खरीखोटी सुनाई है। प्रधानमंत्री का यह संदेश पाकिस्तान के लिए बड़ा सबक है, वह भी तब जब पाकिस्तान जम्मू में अपनी आतंकी गतिविधियां जारी रखे हुए है।

आज से 25 साल पहले कारगिल के द्रास-बटालिक सेक्टर में हुए युद्ध में मुंह की खाने वाले पाकिस्तान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ा संदेश दिया है। लंबे समय से पाकिस्तान के नापाक इरादों पर चुप्पी साधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जमकर खरीखोटी सुनाई है। प्रधानमंत्री का यह संदेश पाकिस्तान के लिए बड़ा सबक है, वह भी तब जब पाकिस्तान जम्मू में अपनी आतंकी गतिविधियां जारी रखे हुए है। कारगिल युद्ध के 25 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नियंत्रण रेखा से बमुश्किल दो मील की दूरी पर खड़े होकर पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया कि उसने हार से कुछ नहीं सीखा है और आतंकवादियों को पनाह देना जारी रखे हुए है। प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी जम्मू सेक्टर के जवाब में थी, जहां हाल के दिनों में आतंकी गतिविधियों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

‘नापाक इरादे कभी कामयाब नहीं होंगे’
प्रधानमंत्री मोदी 1999 के कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए लद्दाख के द्रास (एलओसी से बमुश्किल 9 किलोमीटर दूर) में कारगिल युद्ध स्मारक पर पहुंचे थे। कारगिल युद्ध को हुए 25 साल बीत चुके हैं और राष्ट्र विजय दिवस की रजत जयंती मना रहा है। इस युद्ध में भारत ने 16000 से 18000 फीट ऊंची बर्फीली चोटियों पर अपने 547 जवानों को खो दिया था। इसे दुनिया की सबसे कठिन लड़ाइयों में से एक माना जाता है।

जम्मू सेक्टर में आतंकी गतिविधियों में बढ़ोतरी की तरफ इशारा करते हुए मोदी ने कहा, “आज मैं ऐसी जगह से बोल रहा हूं, जहां आतंक के आका मेरी आवाज सीधे सुन सकते हैं। मैं आतंकवाद के इन संरक्षकों को बताना चाहता हूं कि उनके नापाक इरादे कभी कामयाब नहीं होंगे। हमारे सैनिक पूरी ताकत से आतंकवाद को कुचलेंगे और दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।”

जम्मू सेक्टर में बढ़ीं आतंकी वारदातें
खुफिया जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के 110 से अधिक आतंकवादी जम्मू-कश्मीर में सक्रिय हैं। उनमें से 50 से अधिक पीर पंजाल रेंज के दक्षिण इलाके में सक्रिय हैं, जिसे सैन्य भाषा में जम्मू सेक्टर भी कहा जाता है। आतंकवादी एन्क्रिप्टेड कम्यूनिकेशन के लिए एम-4 कार्बाइन और चीनी अल्ट्रासेट जैसे अत्याधुनिक हथियारों औऱ उपकरणों से लैस हैं। 2021 से अब तक आतंकी गतिविधियों में 50 से अधिक सुरक्षाकर्मी शहीद हो चुके हैं।

कई कमांडिंग हाइट्स पर कब्जा किया
कारगिल युद्ध के दिनों को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें अभी भी याद है कि कैसे हमारे सैनिकों ने इतनी ऊंचाई पर एक कठिन ऑपरेशन को अंजाम दिया था। पहाड़ी इलाकों का फायदा उठाते हुए, हजारों पाकिस्तानी सेना के घुसपैठियों ने नियंत्रण रेखा पार की और श्रीनगर-लेह राजमार्ग (एनएच-1 अल्फा) पर स्थित कई कमांडिंग हाइट्स पर कब्जा कर लिया। कारगिल युद्ध 170 किलोमीटर लंबे पहाड़ी इलाकों पर लड़ा गया, जो कारगिल सेक्टर में मुश्कोह घाटी से शुरू होकर पश्चिमी लद्दाख के तुर्तुक तक था। तकरीबन तीन महीनों तक चला यह युद्ध अभी तक के सबसे कठिन लड़ाइयों में से एक माना जाती है, क्योंकि यह बहुत ऊंचाई पर लड़ी गई थी, जिसमें कुछ चौकियां 18,000 फीट से भी अधिक ऊंचाई पर स्थित थीं। कारगिल युद्ध में एयरफोर्स, इनफैंट्री और आर्टिलरी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ था।

भारत ने पेश किया ‘सत्य, संयम और शक्ति’ का उदाहरण
पाकिस्तानी सेना को खदेड़ने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू किया गया, जिसमें भारत ने अपने 547 बहादुर सैनिकों को खोया। ऑपरेशन विजय के रजय जयंती समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “जब भी पाकिस्तान ने कोई दुस्साहस किया है, उसे हार का सामना करना पड़ा है। उसने इतिहास से कोई सबक नहीं सीखा है।” उन्होंने कहा, “कारगिल में हमने न केवल युद्ध जीता, बल्कि हमने ‘सत्य, संयम और शक्ति’ का एक अविश्वसनीय उदाहरण पेश किया।” प्रधानमंत्री ने उस समय पाकिस्तान के छल को भी उजागर किया कि जब भारत शांति बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा था, तो पाकिस्तान उसके खिलाफ साजिसे रच रहा था। उन्होंने कहा, “सत्य ने झूठ और आतंक को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।”

ये सीख हमेशा याद रहेंगीं
हालांकि कारगिल युद्ध से भारतीय सेना ने कई बड़े सबक भी सीखें हैं कि कैसे युद्ध के दौरान स्ट्रैटेजी और ऑपरेशंस को अमली जामा पहनाया जाए। कारगिल युद्ध को भारत की खुफिया विफलता के तौर पर भी देखा जाता है, और युद्ध ने बताया कि खुफिया जानकारियां और निगरानी की देश को कितनी जरूरत है। पाकिस्तानी सेना के इरादों का समय से पता न लग पाने की वजह से जमीनी और हवाई युद्ध में देरी हुई, जिसकी बड़ी कीमत भारतीय फौजों को चुकानी पड़ी। वहीं, हाई एल्टीट्यूड इलाकों में युद्ध लड़ने के लिए कितनी ट्रेनिंग की जरूरत है, इसका अहसास भारत की सेनाओं को हुआ। हालांकि, कारगिल युद्ध के बाद से अभी तक भारतीय सेना हाई एल्टीट्यूड इलाकों में ट्रेनिंग पर काफी जोर दे रही है। वहीं, 1999 में जिस तरह से भारतीय फौजों ने इस इलाके की अनदेखी की, यह बड़ा सबक है। इन इलाकों में भारतीय सेना की मौजूदगी बढ़ी है और 1999 की तुलना में इस इलाके में 300 गुना से अधिक फौज तैनात है। इसके अलावा तीसरा सबसे बड़ा सबक कारगिल जैसे दुर

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