
चांदी पर छाई महंगाई ने निर्यात की चमक को घटा दिया है। आलम ये है कि 90 फीसदी चांदी का कारोबार ठप हो गया है। निर्यातक भी इस काम को छोड़ रहे हैं।
दिनों दिन चांदी की कीमतें आसमान छू रही हैं। इससे चांदी के उत्पादों का निर्यात जमीन पर आ गया है। 15 साल पहले की तुलना में अब चांदी के उत्पादों से बड़ी संख्या में निर्यातकों ने दूरी बना ली है। जानकार बताते हैं कि महंगाई के कारण 90 फीसदी चांदी का कारोबार ठप हो गया है।
कारोबारियों का कहना कि चांदी की बढ़ती कीमतों ने निर्यात कारोबार की चमक घटा दी। चांदी के दामों में लगातार उछाल से विदेशी सौदे के समय तय हुईं कीमतें अब कई गुना बढ़ गई हैं। लिहाजा विदेशी बाजार में इन उत्पादों की डिलीवरी रोकना मजबूरी बन गई। ऐसे में जिले से चांदी के उत्पाद सिमट गए। करीब एक दर्जन से अधिक ऐसे निर्यातक हैं, जो काम में रुचि नहीं ले रहे हैं। वहीं मध्यवर्गीय व्यापारियों ने दूसरे उत्पादों की ओर रुख बढ़ा दिया है। चांदी में डील के समय तय कीमत पर उत्पाद नहीं बेचे जा सकते। इससे घाटा होने की आशंका है।
ये उत्पाद होते हैं निर्यात
जिले से करीब एक दर्जन से अधिक उत्पाद निर्यात होते हैं। इनमें चांदी के सिक्के, पेंडेंट, स्टर्लिंग चांदी की चेन, अंगूठियां, जरी पोशाक, फ्रूट बाउल, कैंडल स्टैंड समेत अन्य उत्पाद शामिल हैं।
इन देशों में होता है निर्यात
जिले से चांदी उत्पादों का निर्यात अमेरिका, इटली, फ्रांस, इंग्लैंड में शुरू हुआ था। इन देशों के साथ मांग देख सऊदी अरब, दुबई, समेत कुछ अन्य देशों में भी इसका निर्यात है।
क्या बोले सराफा व्यापारी
मुकेश अग्रवाल ने कहा एक साल के भीतर चांदी के दाम तीन लाख रुपये प्रति किलो के पास पहुंच गए हैं। इसकी वजह से चांदी के उत्पादों के दाम बढ़ते गए और निर्यात कम हो गया।
मनोज अग्रवाल ने बताया कि चांदी उत्पादों का निर्यात पहले की अपेक्षा न के बराबर बचा है। शहर में चांदी के उत्पाद बनाने वाले कई व्यापारी काम बंद करने की कगार पर आग गए हैं।
राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि चांदी की बढ़ती कीमतों की वजह से उत्पाद महंगे हो गए हैं। इससे बहुत कम ऑर्डर मिल रहे हैं। कार्य ठप हो गया है। एल्युमिनियम के उत्पादों की मांग बढ़ रही है।
व्यापारी नेता शशि भानु गर्ग ने बताया कि चांदी के दामों में अभी तक उतार-चढ़ाव बना हुआ। कीमतें स्थिर न रहने से छह महीने में पांच से 10 प्रतिशत ही चांदी उत्पादों का निर्यात हुआ है।
