
Indian Railways भारतीय रेलवे ने ट्रेन स्टाफ के लिए बर्थ आवंटन के नियमों में बदलाव किया है, जिससे यात्रियों को अधिक सीटें उपलब्ध हो सकें। अब एसी स्टाफ को महंगे कोचों में बर्थ नहीं दी जाएगी, वहीं सफाई स्टाफ को पूरी ट्रेन में अलग-अलग तैनात किया जाएगा। पेंट्री कार वाली ट्रेनों में खाना बेचने वाले कर्मचारियों को भी सीट आवंटित नहीं की जाएगी। इन नए प्रावधानों के कारण यात्रियों को औसतन 8 से 12 अतिरिक्त सीटें मिल पाएंगी और इससे रेलवे के राजस्व में भी इजाफा होगा।
भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा बढ़ाने और ट्रेन संचालन में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रेलवे बोर्ड के मैकेनिकल निदेशालय ने जो नए निर्देश जारी किए हैं, उनके तहत ट्रेन में तैनात ऑन-बोर्ड स्टाफ (ओबीएचएस, एसी स्टाफ और वेंडिंग स्टाफ) को दी जाने वाली बर्थ के नियमों में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं। इस निर्णय से सबसे अधिक लाभ आम यात्रियों को मिलेगा, क्योंकि अब तक स्टाफ के लिए आरक्षित की जाने वाली कई महत्वपूर्ण सीटें सामान्य बुकिंग के लिए उपलब्ध हो जाएंगी।
क्यों पड़ी नियमों को बदलने की जरूरत?
भारतीय रेलवे में अक्सर देखा गया है कि लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों को ‘वेटिंग लिस्ट’ की परेशानी का सामना करना पड़ता था, जबकि कई कोचों में गेट के पास की सीटें या बीच की कुछ बर्थ ‘स्टाफ’ के लिए आरक्षित होती थीं। पुराने नियमों में स्पष्टता की कमी के कारण, ऑन-बोर्ड स्टाफ जैसे सफाईकर्मी या एसी मैकेनिक कभी-कभी ऐसी सीटों का उपयोग कर लेते थे जो यात्रियों के लिए होनी चाहिए थीं। इसके अलावा, पेंट्री कार होते हुए भी खाना बेचने वाले कर्मचारी सीटें घेरने का काम करते थे, जिससे यात्रियों को असुविधा होती थी। इन समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से रेलवे ने पुराने सभी निर्देशों, जैसे 2016 और 2018 के सर्कुलर, को रद्द कर नई व्यवस्था लागू की है।
एसी कोच स्टाफ को अब नहीं मिलेगी ‘प्रीमियम’ बर्थ
भारतीय रेलवे ने अपने नए नियमों के तहत एसी मेंटेनेंस स्टाफ के लिए पूरी ट्रेन में कुल केवल दो बर्थ आरक्षित रखने का प्रावधान किया है। इसके साथ ही, पहले से दी गई सीटों को भी वापस लिया जाएगा। आदेश में यह स्पष्ट कहा गया है कि यदि पहले “किराया देने वाली सीट” के नाम पर कोई सीट स्टाफ को दी गई थी, तो उसे तत्काल प्रभाव से हटा दिया जाए। पहले प्रत्येक कोच में अटेंडेंट को एक सीट दी जाती थी, यानी अगर ट्रेन में 10 एसी कोच होते थे, तो 10 सीटें स्टाफ को आवंटित होती थीं। लेकिन अब इस नियम में बदलाव कर दिया गया है।
यात्रियों को फायदा
इससे फर्स्ट एसी और सेकेंड एसी की वो सीटें, जो पहले स्टाफ के पास रहती थीं, अब पूरी तरह यात्रियों के लिए खाली रहेंगी। हर ट्रेन में औसतन चार से छह महंगी सीटें यात्रियों के खाते में वापस आएंगी।
सफाई स्टाफ झुंड बनाकर नहीं बैठेंगे
आन-बोर्ड हाउसकीपिंग स्टाफ (ओबीएचएस) वह टीम होती है जो ट्रेन के टॉयलेट और कोचों की सफाई का कार्य करती है। इनके लिए एक नया ‘स्प्रेड मॉडल’ लागू किया गया है। इस मॉडल के अनुसार, सफाई कर्मचारी अब एक जगह समूह बनाकर नहीं बैठेंगे। उन्हें ट्रेन में चार अलग-अलग कोचों में एक-एक साइड लोअर बर्थ आवंटित की जाएगी। ज़ोनल रेलवे को यह सुनिश्चित करना होगा कि ये चार कोच एक-दूसरे के समीप न हों, बल्कि उनके बीच कम से कम दो कोच का फासला हो। ये बर्थ ट्रेन के दोनों छोरों, यानी शुरुआत और अंत के नजदीक वाले कोचों में दी जाएंगी।
सफाईकर्मी चंद मिनटों में आपके कोच में पहुंचेगा
पहले यात्रियों को सफाईकर्मी को ढूंढने के लिए कई कोच पार करने पड़ते थे। अब चूंकि वे पूरी ट्रेन में फैले होंगे, तो आपके बुलाने पर सफाईकर्मी चंद मिनटों में आपके कोच तक पहुंच जाएगा। साथ ही, साइड लोअर बर्थ का चुनाव इसलिए किया गया है ताकि बीच की मुख्य बर्थ यात्रियों के लिए बची रहें।
खाना बेचने वाले स्टाफ (टीएसवी) के लिए कड़े नियम
ट्रेन साइड वेंडिंग (टीएसवी) स्टाफ को लेकर रेलवे ने सबसे बड़ा वित्तीय फैसला लिया है। पेंट्री कार होने पर ‘नो बर्थ’ होगा। यानी किसी ट्रेन में पेंट्री कार (रसोई यान) लगी है, तो खाना बेचने वाले कर्मचारियों को कोच के अंदर एक भी सीट नहीं मिलेगी। उन्हें पेंट्री कार में ही अपनी जगह बनानी होगी। जिन ट्रेनों में पेंट्री कार नहीं है, वहां वेंडिंग स्टाफ को स्लीपर क्लास में दो बर्थ दी जाएंगी।
यात्रियों के कंफर्म होंगे टिकट
अक्सर पेंट्री कार होने के बावजूद वेंडर कोच में सीटें घेरे रहते थे। अब उन 2-3 सीटों पर आम यात्री कंफर्म टिकट पा सकेंगे।
‘मिनी-पेंट्री’ और भविष्य की योजना
रेलवे एक ऐसी तकनीक पर काम कर रहा है जिसे ‘माडिफाइड मिनी-पेंट्री’ कहा जाता है। भविष्य में जैसे ही कोच के भीतर सामान रखने वाली जगह को स्टाफ के बैठने लायक बना दिया जाएगा, वैसे ही सफाई स्टाफ और एसी स्टाफ को दी गई ये छह सीटें (चार ओबीएचएस + 2 एसी) भी वापस ले ली जाएंगी। यानी भविष्य में स्टाफ के पास कोच के भीतर एक भी यात्री बर्थ नहीं होगी, वे सिर्फ अपने डेजिग्नेटेड एरिया में बैठेंगे।
दुरुपयोग रोकने के लिए पेनाल्टी और निगरानी
रेलवे ने केवल नियम नहीं बनाए, बल्कि उनकी कड़ाई से पालना के लिए ‘चेक एंड बैलेंस’ भी रखा है। यदि सफाई स्टाफ ट्रेन में नहीं चढ़ता है, तो इसकी सूचना तुरंत कमर्शियल कंट्रोल को दी जाएगी। वह बर्थ अगले स्टेशन पर किसी वेटिंग लिस्ट वाले यात्री को अलाट कर दी जाएगी। बर्थ को खाली रखना या स्टाफ द्वारा अनधिकृत रूप से उपयोग करना अपराध माना जाएगा। यदि ठेकेदार का स्टाफ आवंटित बर्थ का दुरुपयोग करता है या किसी यात्री की सीट पर बैठता है, तो ठेकेदार पर भारी पेनाल्टी लगाई जाएगी।
आम आदमी के लिए क्या मिलेगा लाभ?
यदि इस पूरी खबर का सार देखा जाए, तो अब यात्रियों को आम ट्रेन में निम्नलिखित सुविधाएँ और फायदे मिलेंगे। अधिक कंफर्म सीटें: प्रत्येक ट्रेन में औसतन 8 से 12 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी, जो एसी और टीएसवी स्टाफ की कटौती के चलते संभव हो रहा है। राजस्व में बढ़ोतरी: महंगे कैटेगरी (एसी प्रथम/एसी द्वितीय) की सीटों की बिक्री से रेलवे की आय बढ़ेगी, जिसे यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। उन्नत सेवा: पूरी ट्रेन में सफाईकर्मी मौजूद रहेंगे, जिससे सफाई से जुड़ी शिकायतें कम होने की संभावना है।
पारदर्शिता :
टीटीई को अब पता होगा कि कौन सी सीट स्टाफ की है और कौन सी यात्री की, जिससे अनधिकृत कब्जे की संभावना खत्म हो जाएगी।
स्टाफ कब्जे वाली सीट आपको होगी कंफर्म
रेलवे का यह नया ‘बर्थ आवंटन मॉडल’ इस बात का प्रमाण है कि विभाग अब ‘ऑपरेशनल स्टाफ’ की जरूरतों और ‘यात्री सुविधाओं’ के बीच एक सटीक संतुलन बना रहा है। अब आपकी अगली यात्रा में, गेट के पास वाले “स्टाफ कब्जे” वाली सीटों पर आपके किसी परिजन का कंफर्म टिकट हो सकता है।
