दरिंदों को फांसी: गंदी सामग्री कई जगह भेजता था JE, मदद करती थी बीवी; पेन ड्राइव, लैपटॉप और ये सबूत बने मददगार

Execution for the perpetrators
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यूपी के बांदा जिले की विशेष अदालत ने 34 बच्चों के यौन शोषण और उनकी अस्लील तस्वीरें व वीडियो वायरल करने के घूणित मामले में सिंचाई विभाग के निलंबित जेई रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने तीसरे आरोपी की फाइल अलग कर दी। उस पर ई-मेल के माध्यम से जानकारी साझा करने का आरोप है। जमानत मिलने के बाद यह जेल से बाहर है।

बांदा में सीबीआई ने सजा के लिए एम्स में कराए गए बच्चों के मेडिकल और इलेक्ट्रिनक साक्ष्य में गंदे वीडियो की पेन ड्राइव अदालत को सौंपी। अदालत ने गंदे वीडियो का अवलोकन करने पर उसे दोषी पाया। नाबालिगों के साथ यौन शोषण के इस बहुचर्चित मामले में सीबीआई ने लंबी कोशिशों के बाद मासूमों के यौन शोषण और अश्लील वीडियो व फोटो विदेशों तक बेचकर लाखों कमाने वाले निलंबित जेई रामभवन को दबोचा था।

पेन ड्राइव, लैपटॉप, मोबाइल जैसे पुख्ता साक्ष्य बरामद करने के साथ उसे सलाखों के पीछे पहुंचाया और पूरे नेटवर्क की तलाश में जुट गई थी। सीबीआई की कोशिशें रंग लाई और करीब 12 साल पहले के वीडियो फुटेज के आधार पर पीड़ितों की पहचान होने लगी।

करीब 34 पीड़ितों की पहचान की गई जो हैवानियत का शिकार बने। उधर, पति रामभवन के ऊपर शिकंजा कसते देख उसकी पत्नी दुर्गावती ने बचाने की कोशिशें शुरू कर दी थीं। इसमें सबसे अहम कड़ी पीड़ित बच्चे और उनके अभिभावक रहे।

रामभवन की पत्नी ने इन रुपयों को ही अपना हथियार बनाया

सीबीआई सूत्र बताते हैं कि घिनौने कारनामे से लाखों कमाने वाले रामभवन की पत्नी ने इन रुपयों को ही अपना हथियार बनाया। सीबीआई गवाहों की सूची बना रही थी, उधर दुर्गावती ने ऐसे लोगों को तोड़ने की दिशा में हर तिकड़म अपनाना शुरू कर दिया था।

इलेक्ट्रानिक साक्ष्य और पीड़ित बच्चों के एम्स में हुआ मेडिकल बना आधार

सीबीआई के यह इलेक्ट्रानिक साक्ष्य और पीड़ित बच्चों के एम्स में कराए मेडिकल को आधार बनाया। सीबीआई की पूछताछ में आरोपी रामभवन ने बताया कि वह पांच से 16 साल के बच्चों को शिकार बनाता था।

उन्हें जाल में फंसाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का लालच देता था। आरोपी सोशल मीडिया पर भी यह सामग्री शेयर करता था। पीड़ित परिवारों को तस्वीरें दिखाकर ब्लैकमेल कर रुपये मांगता था।

एम्स की पांच सदस्यीय मेडिकल टीम ने बांदा आकर की थी जांच
जांच के दौरान यह खुलासा भी हुआ कि इन बच्चों को लाने में राम भवन की पत्नी की भी अहम भूमिका थी। जांच के दौरान सीबीआई को शक भी हुआ था कि रामभवन को एड्स भी हो सकता है। इस लिहाजा उसका मेडिकल परीक्षण दिल्ली के एम्स में कराया गया था। साथ ही जिन बच्चों का यौन शोषण हुआ था उनकी मेडिकल जांच के लिए एम्स की एक विशेष मेडिकल टीम बांदा भी आई थी।

एम्स की पांच सदस्यीय विशेष मेडिकल टीम में महिला और पुरुष डॉक्टर भी शामिल थे। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, इस जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया था कि आरोपी इंजीनियर ने कुछ बच्चों के साथ अनेकों बार कुकर्म किया था।

तीन साल तक नहीं खाली हुआ
कमरा सजा सुनाए जाने के बाद भी एसडीएम कॉलोनी का कमरा तीन साल तक खाली नहीं हुआ। वर्ष 2023 में आरोपी का भाई सामान ले गया, लेकिन तीन साल का किराया नहीं चुकाया। घटना के बाद मोहल्ले में लंबे समय तक लोग किराए पर कमरा देने से हिचकिचाते रहे। आज भी उस गली में सन्नाटा पसरा रहता है।

34 बच्चों के यौन शोषण में निलंबित जेई और पत्नी को फांसी की सजा
यूपी के बांदा जिले की विशेष अदालत ने 34 बच्चों के यौन शोषण और उनकी अस्लील तस्वीरें व वीडियो वायरल करने के घूणित मामले में सिंचाई विभाग के निलंबित जेई रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने तीसरे आरोपी की फाइल अलग कर दी। उस पर ई-मेल के माध्यम से जानकारी साझा करने का आरोप है। जमानत मिलने के बाद यह जेल से बाहर है।

विशेष पॉक्सो अदालत के न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने 163 पेज के विस्तृत फैसले में इस घिनौने अपराध को जघन्यतम करार दिया। कोर्ट ने कहा, कई जिलों में बड़े पैमाने पर अपराध को अंजाम दिया गया।

दोषियों का नैतिक स्तर पर हद दर्ज तक नीचे गिरना इसे असाधारण और घिनौना अपराध बनाता है। इनमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है, इसलिए कड़ी से कड़ी सजा की जरूरत है। कोर्ट ने यूपी सरकार को पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया।

साथ ही, आरोपियों के घर से बरामद राशि को भी पीड़ित बच्चों में समान रूप से वितरित करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने रामभवन को अलग-अलग धाराओं में दोषी पाते हुए 6.45 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जबकि उसकी पत्नी दुर्गाचती पर 5.40 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।

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