Protest: CJP का प्रदर्शन, स्पीकर से राहुल की मुलाकात फिर धरने पर संग्राम, 48 घंटे में कैसे बदला छात्र आंदोलन?

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नीट पेपर लीक के बाद सोशल मीडिया पर शुरू हुई मुहिम- कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) बीते चार हफ्ते से अधिक समय से लगातार सुर्खियों में है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित शांतिपूर्ण संसद मार्च, छात्रों और युवाओं पर दिल्ली पुलिस का बल प्रयोग और अगले दिन लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन का मामला भी लगातार चर्चा में है। विपक्ष सरकार पर जिम्मेदारी और जवाब देने से भागने का आरोप लगा रहा है। आक्रोशित नेता प्रधानमंत्री आवास की दहलीज तक पहुंच गए। दिन भर हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद देर रात शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान भी सामने आया। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंचकर सीजेपी के आंदोलन के साथ एकजुटता प्रकट की। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया दी है।

क्या आंदोलन कर रही सीजेपी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अडिग है? छात्रों के समर्थन में अनशन कर रहे लद्दाख के शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का रुख क्या है? दिल्ली की सड़कों पर उतरे लाखों युवाओं के आक्रोश, विपक्ष के आरोप और दिल्ली-पुलिस के बलप्रयोग पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की राय क्या है? इस खबर में ऐसे तमाम सवालों के जवाब जानिए।

राहुल गांधी दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद देर रात क्या बोले?
लोकसभा विपक्ष के नेता राहुल गांधी को दिल्ली पुलिस ने छत्रसाल स्टेडियम में हिरासत में रखा। देर रात रिहाई के बाद उन्होंने एक्स हैंडल पर जारी एक वीडियो में कहा, आज सुबह मेरी मुलाकात लोकसभा अध्यक्ष से हुई और मैंने उनसे कहा कि हमें कल छात्रों के साथ हुई घटना पर बहस करने की अनुमति दी जानी चाहिए। अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें सरकार से अनुमति लेनी होगी। इससे स्पष्ट हो गया कि सरकार को बहस कराने में कोई दिलचस्पी नहीं है। इसके बाद हमने प्रधानमंत्री आवास के सामने जाकर विरोध प्रदर्शन करने और छात्रों के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का फैसला किया। छात्रों की मांगों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा, संसद मार्च के दौरान छात्रों को पीटने और अपमानित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई और दिल्ली पुलिस में दर्ज छात्रों के खिलाफ सभी मामले वापस लिया जाना शामिल हैं। पूरा विपक्ष चाहता है कि कल लोकसभा और राज्यसभा में इस मुद्दे पर बहस हो।

वांगचुक से मिले मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की और उनका हाल जाना। अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद, वांगचुक को शाम को सफदरजंग अस्पताल से छुट्टी देकर आगे के इलाज के लिए गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।

सूत्रों ने बताया कि नड्डा और जितेंद्र सिंह ने अस्पताल में सोनम वांगचुक से मुलाकात की है। कड़ी सुरक्षा के बीच शाम करीब साढ़े सात बजे वांगचुक को एंबुलेंस से मेदांता अस्पताल लाया गया। मेदांता अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. सुशीला कटारिया की देखरेख में आईसीयू 8 में भर्ती किया गया है।

सफदरजंग अस्पताल ने मंगलवार शाम 6:40 बजे वांगचुक को छुट्टी देकर गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल की टीम को सौंप दिया। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह कदम उठाया गया। सफदरजंग अस्पताल से छुट्टी देते समय जरूरी मेडिकल पैरामीटर स्थिर थे। हालांकि, पैन्साइटोपेनिया की समस्या बनी हुई है। इसके अलावा उनका सीरम पोटेशियम लेवल 3.4 एमईक्यू/लीटर था। इलाज जारी रखने के लिए सभी जरूरी मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और इलाज से जुड़े दस्तावेज की कॉपी भी मेडिकल टीम को दी गई। पैन्साइटोपेनिया में तीनों रक्त कोशिकाओं का स्तर सामान्य से कम हो जाता है।

दिल्ली पुलिस की जांच किन पहलुओं पर, सीक्रेट एप मामला क्या?
सीजेपी के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई हिंसा की जांच में दिल्ली पुलिस कुछ नए सुराग मिलने का दावा किया। पुलिस अब प्रदर्शनकारियों के कथित चैट संदेशों और एक सीक्रेट एप के इस्तेमाल की जांच कर रही है। जांच का फोकस उन संदेशों पर है, जिनमें इंटरनेट बंद होने की आशंका के बीच संपर्क बनाए रखने और आंदोलन के लिए जान देने जैसी बातें लिखी गई हैं।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले इन कथित चैट संदेशों की सच्चाई और इनमें शामिल लोगों की पहचान की पुष्टि की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि ये संदेश असली हैं या फिर किसी तरह की भ्रामक जानकारी या दुष्प्रचार का हिस्सा हैं। एक वरिष्ठ पुलिस सूत्र ने बताया कि कुछ संदेशों में इंटरनेट सेवा बंद होने की स्थिति में आपसी संपर्क बनाए रखने और सूचना साझा करने के वैकल्पिक तरीकों पर चर्चा की गई थी। इससे संकेत मिलता है कि प्रदर्शनकारियों ने संभावित इंटरनेट बंदी को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी की थी।

शिक्षा मंत्री ने तोड़ी चुप्पी, राहुल गांधी को लेकर क्या कहा?

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ते हुए आरोप लगाया कि राहुल गांधी छात्रों का फायदा उठा रहे हैं।
प्रधान ने दावा किया कि राहुल गांधी ने सरकार की जवाबदेही की तरफ संकेत करते हुए कहा- हमें युवाओं और छात्रों के लिए इनके गुस्से से कहीं अधिक करने की जरूरत है।
उन्होंने आगे कहा, हमारी सरकार नीट पर चर्चा करने और सदन में हमारे युवाओं की हर सही चिंता को दूर करने के लिए सौ फीसदी प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि भारत के छात्र राजनीतिक अभियान में मोहरा बनने से कहीं बेहतर के हकदार हैं। वे अव्यवस्था के बजाय निश्चितता, नारों के बजाय समाधान और गड़बड़ी के बजाय जिम्मेदारी के हकदार हैं।
शिक्षा मंत्री ने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि सरकार की व्यापक चर्चा की तैयारी के बावजूद कांग्रेस ने लोकतांत्रिक बहस के बजाय राजनीतिक तमाशा चुना।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य छात्रों के लिए समाधान नहीं, बल्कि राजनीतिक सुर्खियों के लिए व्यवधान पैदा करना था।
प्रधान ने आगे कहा कि राहुल गांधी छात्रों के हितों की बात नहीं कर रहे हैं। वे चर्चा का वास्तविक अवसर मिलने के बावजूद टकराव पैदा करने की ताक में हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस मानसून सत्र के दौरान ‘बाधा उत्पन्न करने’ के लिए छात्रों का इस्तेमाल राजनीतिक हथकंडे की तरह कर रही है।

राहुल की नाक से निकला खून
राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को नीट मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कांग्रेस के कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। कांग्रेस ने इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सरकार पर निशाना साधा।

क्या दिल्ली पुलिस-सीआरपीएफ के बीच ठनी?
जिस वक्त राहुल गांधी को हिरासत में लिया जा रहा था, तब उनके सुरक्षा कर्मी साथ रहे। उन्होंने राहुल को ज्यादा धक्कामुक्की से बचाया। हालांकि, राहुल गांधी जमीन पर लेट गए थे, इसलिए दिल्ली पुलिस को उन्हें वैन तक पहुंचाने में खूब जोर लगाना पड़ा। जैसी ही दिल्ली पुलिस राहुल को उठाने का प्रयास करती, सीआरपीएफ की जेड प्लस सुरक्षा में तैनात कमांडो उनसे आग्रह करते कि वे इस तरह अपनी कार्रवाई करें कि जिससे सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति को किसी तरह का शारीरिक नुकसान न पहुंचे।

बंगाल से तमिलनाडु तक… राज्यों में कैसा है माहौल?
टीएमसी ने केंद्र पर बोला हमला: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने दिल्ली में सीजेपी के संसद मार्च के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो वह इस आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली जाएंगी। मंगलवार को कोलकाता में टीएमसी की वार्षिक 21 जुलाई शहीद दिवस रैली को संबोधित करते हुए ममता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नीत केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों को दबाने का आरोप लगाया।

ममता ने मंगलवार को दिल्ली में हुई झड़पों का जिक्र करते हुए कहा, अगर जरूरत पड़ी तो मैं दिल्ली जाऊंगी और सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल होऊंगी। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारी जब संसद परिसर के करीब पहुंचे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कार घुमा ली और वहां से चले गए। हालांकि, ममता ने इस दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया।

टीवीके ने की नीट परीक्षा खत्म करने की मांग: तमिलनाडु की सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) पार्टी ने भी दिल्ली में पुलिस की कार्रवाई की निंदा की। पार्टी एक्स पर एक बयान में कहा, राजधानी में लोकतंत्र को कुचलने की यह घटना बेहद निंदनीय है। दिल्ली में युवाओं के शांतिपूर्ण प्रदर्शन का समर्थन करने पहुंचे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को दिल्ली पुलिस द्वारा घसीटकर ले जाना और हथकड़ी लगाकर गिरफ्तार करना लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है। इसकी हम कड़ी निंदा करते हैं।

पार्टी ने कहा, नीट परीक्षा शुरू होने के समय से ही इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हैं। इस परीक्षा के कारण छात्र लगातार मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं और उनके भविष्य के सपने अनिश्चितता में बदल गए हैं। हर साल नीट परीक्षा से छात्रों को होने वाला नुकसान रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इसलिए हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि नीट परीक्षा को पूरी तरह खत्म किया जाए।

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