अब मैदान में E20 जनता पार्टी: सोशल मीडिया पर जुड़े हजारों लोग, क्या हैं मांगे और किस मंत्री का मांगा इस्तीफा?

E20 Janata Party
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ईंधनों की बढ़ी हुई कीमत और पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट को लेकर बढ़ते आक्रोश के बीच ई-20 जनता पार्टी ने सोशल मीडिया कैंपेन शुरू किया है। जिसकी तरफ से संसद मार्च के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का इस्तीफा मांगा गया है।

नीट परीक्षा पेपर लीक और सीजेआई सूर्यकांत के बयान के बाद कॉकरोच जनता पार्टी का गठन हुआ। फिर जंतर-मंतर पर सीजेपी समर्थकों की तरफ से प्रदर्शन शुरू किया गया, जो एक महीने से ज्यादा वक्त तक चला। फिर 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा सौंपा। इसके बाद केंद्र सरकार के सीजेपी की बाकी मांगों को माना, जिसके बाद इस प्रदर्शन को खत्म करने की घोषणा की गई। अब एक नए सोशल मीडिया कैंपेन ने सुर्खियां बटोरी है।

कैंपेन से सोशल मीडिया पर हजारों लोग जुड़े
ई-20 जनता पार्टी के नाम से बने इस कैंपेन के सोशल मीडिया एक्स पर 30 हजार से ज्यादा फॉलोवर्स हैं, जबकि इंस्टाग्राम पर ये आंकड़ा अभी एक हजार के करीब पहुंच रहा है। एक्स पर पार्टी के एक पोस्ट में लिखा गया- क्या हम सिर्फ ईंधन इस्तेमाल करने वाले लोग हैं, या हम जागरूक नागरिक हैं जिन्हें सवाल पूछने का अधिकार है? इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर पूरे देश में बड़े पैमाने पर चर्चा हो रही है और अलग-अलग दावे और नजरिए सामने आ रहे हैं। ऐसे में, हर नागरिक और हर गाड़ी मालिक को साफ, पारदर्शी और सबूतों पर आधारित जानकारी मिलनी चाहिए।

पोस्ट में आगे लिखा गया- किसी सरकारी नीति के बारे में सवाल पूछने का मतलब उसका विरोध करना नहीं है। लोकतंत्र में सवाल पूछना एक बुनियादी अधिकार है और यह एक जागरूक समाज की निशानी है। अगर कोई नीति सच में जनहित में है, तो उसे जनता की पड़ताल पर खरा उतरना चाहिए, और हर जायज सवाल का जवाब तथ्यों, पारदर्शिता और वैज्ञानिक सबूतों के साथ दिया जाना चाहिए। आइए, हम अपनी राय जानकारी और सबूतों के आधार पर बनाएं – न कि अंदाजों या भावनाओं के आधार पर। जानकारी रखें। सवाल पूछें। जवाब मांगें। यही हर जागरूक नागरिक की जिम्मेदारी है।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का मांगा गया इस्तीफा
वहीं, कई अन्य पोस्ट में केंद्रीय सड़क-परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग की गई है और जनता से इस आंदोलन को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने की अपील की गई है। एक दूसरे पोस्ट में लिखा गया – यह किसी पार्टी की नहीं, जनहित की बात है। आओ मिलकर आवाज उठाये, एथनॉल नीति पर सरकार से सवाल करे।

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