टाइगर श्रॉफ केस: जुहू में फायरिंग से पहले कहां चली थी गोली? सलमान-आमिर ही नहीं, इस अभिनेता के घर भी हुई रेकी

The Tiger Shroff Case
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टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी के मामले में पुलिस जांच के दौरान खुलासा हुआ है कि कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े शूटरों ने सलमान खान, आमिर खान और रणबीर कपूर के घरों की भी रेकी की थी। पुलिस के मुताबिक, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के कारण अन्य अभिनेताओं को निशाना बनाने का विचार छोड़ दिया गया और टाइगर श्रॉफ को चुना गया।

टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी के मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान एक बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई गैंग के लिए काम करने वाले शूटरों ने सलमान खान के बांद्रा स्थित घर के अलावा बॉलीवुड के दो अन्य बड़े अभिनेताओं आमिर खान और रणबीर कपूर के घरों की भी रेकी की थी। आरोपियों ने आमिर खान के खार स्थित घर और रणबीर कपूर के बंगले की निगरानी की थी।

आरोपियों ने दूसरे अभिनेताओं पर हमले का विचार क्यों छोड़ा?
पुलिस की जांच में सामने आया है कि टाइगर श्रॉफ मूल रूप से इन शूटरों का निशाना नहीं थे। उन्हें इसलिए चुना गया, क्योंकि उनके पास सुरक्षा का खास इंतजाम नहीं था। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने दूसरे अभिनेताओं पर हमले का विचार इसलिए छोड़ दिया था, क्योंकि उनकी सुरक्षा व्यवस्था को भेदना काफी मुश्किल था। हरियाणा के सोनीपत जिले के रहने वाले 18 साल के शूटर फूल सिंह और रेहान अंसारी 18 अक्तूबर को हुई गोलीबारी से पहले करीब एक महीने तक मुंबई में रुके थे। पुलिस के मुताबिक, दोनों दादर और जुहू के अलग-अलग लॉज में रहे थे। इस दौरान उन्होंने गोलीबारी में इस्तेमाल की गई बजाज पल्सर मोटरसाइकिल खरीदने समेत करीब दो लाख रुपये खर्च किए थे। जांच में सामने आया है कि मुंबई में रहने के दौरान आरोपियों ने सलमान खान, आमिर खान और रणबीर कपूर के घरों की जानकारी जुटाई थी।

आरोपियों ने पिस्तौल चलाने का अभ्यास कहां किया?
पूछताछ में शूटरों ने यह भी बताया कि टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी से ठीक एक सप्ताह पहले 11 अक्टूबर को वे जुहू के उस फुटबॉल मैदान में गए थे, जहां टाइगर श्रॉफ अक्सर खेलने जाते हैं। उस समय उनके पास हथियार नहीं थे। उन्हें हमले में इस्तेमाल करने के लिए पिस्तौलें 17 अक्टूबर को गोलीबारी से एक दिन पहले मिली थीं। इसके बाद उन्होंने एक सुनसान जंगली इलाके में पिस्तौल चलाने का अभ्यास किया था। इस दौरान उनकी एक पिस्तौल जाम हो गई थी।

टाइगर पर हमले से पहले कहां चल गई थी गोली?
आरोपी इन हथियारों को अपने ठहरने वाले लॉज में ले आए थे। पुलिस के मुताबिक, जब वे पिस्तौल को ठीक करने की कोशिश कर रहे थे, तभी अचानक उससे गोली चल गई। मुंबई पुलिस को उम्मीद है कि गिरफ्तार किए गए सभी दस आरोपियों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने पर साजिश से जुड़ी कई और अहम जानकारियां मिल सकती हैं। इनमें दोनों मुख्य शूटर फूल सिंह और रेहान अंसारी के अलावा उनका एक मददगार ऋतिक कुमार भी शामिल है।

अब पुलिस की जांच कैसे आगे बढ़ेगी?
आरोपियों को नई दिल्ली जाने वाली ट्रेन में कोटा के पास रोका गया था और गिरफ्तार करने के बाद बुधवार को मुंबई लाया गया था। पुलिस को अभी 18 अक्टूबर की गोलीबारी में इस्तेमाल किए गए हथियार और आरोपियों के मोबाइल फोन बरामद करने हैं। सभी आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को दो महिलाओं समेत चार अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था। इन पर शूटरों को हथियार मुहैया कराने और उन्हें पनाह देने का आरोप है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कुणाल संजय, सुमित सोरालिया, राधा वर्मा और बबीता राव के रूप में हुई है। इन्हें दिल्ली और हरियाणा के सोनीपत से पकड़ा गया था। इसके बाद बुधवार को सोनीपत से तीन और आरोपियों समीर, जतिन और अंकित को गिरफ्तार किया गया।

कौन है साजिश की अहम कड़ी?
पुलिस के मुताबिक, समीर इस साजिश की अहम कड़ी है। वह 18 अक्टूबर को हुई गोलीबारी की साजिश रचने के आरोपी लॉरेंस बिश्नोई गैंग के प्रमुख गुर्गे अनिल पंडित के लगातार संपर्क में था। जांच में यह भी सामने आया है कि जतिन ने कुणाल के साथ अमृतसर की यात्रा की थी। पुलिस को संदेह है कि इसी दौरान वे गोलीबारी में इस्तेमाल किए गए हथियार लेकर आए थे। इन हथियारों को राधा वर्मा और बबीता राव मुंबई लेकर आई थीं और दोनों महिलाओं ने बाद में ये हथियार सीधे शूटरों को सौंप दिए थे। पुलिस के मुताबिक, जतिन शूटरों के साथ मुंबई भी आया था। यहां उसने उनके ठहरने का इंतजाम किया और खर्च के लिए पैसे भी दिए थे। वहीं, अंकित पर आरोप है कि उसने मुंबई में शूटरों के लिए खाने-पीने और रहने समेत दूसरी जरूरी चीजों की व्यवस्था करने में मदद की थी।

सरकार क्या कदम उठाने जा रही है?
टाइगर श्रॉफ की कार पर रविवार को हुई गोलीबारी के मामले में रैपिडो राइडर का नाम सामने आने के बाद महाराष्ट्र का परिवहन विभाग बाइक टैक्सियों को लेकर सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। इस घटना ने बाइक टैक्सी कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया और चालकों की सुरक्षा जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बुधवार को कंपनियों को निर्देश दिया कि वे अपने साथ जुड़ने वाले सभी चालकों के पुराने रिकॉर्ड और पृष्ठभूमि की अच्छी तरह जांच करें। उन्होंने साफ किया कि राज्य सरकार बाइक टैक्सी नीति का पालन कराने के लिए अगले हफ्ते तक और कड़े नियमों का ऐलान करने जा रही है।

परिवहन मंत्री ने माना कि चालकों को जोड़ते समय उनका महाराष्ट्र का निवासी होने का प्रमाणपत्र और पुलिस जांच रिपोर्ट न मांगना बड़ी गलती रही है। अब सरकार इस कमी को दूर करने के लिए दस्तावेजों की जांच और पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य कर रही है। सितंबर में लागू की गई नई बाइक टैक्सी नीति की खामियों को दूर करने के लिए परिवहन आयुक्त को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है ताकि यह पता चल सके कि कंपनियां नियमों का कितना पालन कर रही हैं।

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