मुस्कान-साहिल को फांसी की सजा: मेडिकल स्टोर से मनाली तक, गवाहों के बयानों ने बयां की सौरभ की मौत की कहानी

Death Penalty for Muskan and Sahil
Death Penalty for Muskan and Sahil
Death Penalty for Muskan and Sahil

मेरठ नीले ड्रम कांड में गवाहों ने कोर्ट में बताई सौरभ की हत्या की पूरी कहानी सुनाई। मेडिकल स्टोर से मनाली तक, ऐसे खुली खूनी इश्क की परतें। इन्हीं की वजहों से कातिलों को सजा-ए-मौत मिली। सौरभ हत्याकांड में पुलिस ने 54 दिन में आरोप-पत्र दाखिल किए। कोर्ट में 22 गवाहों ने बयान दिए। 590 दिन बाद कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई।

मेरठ के बहुचर्चित नीले ड्रम वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने पति की हत्या करने वाली मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को बुधवार को मृत्युदंड की सजा सुनाई। जिला जज ने 30 सितंबर 2026 को 22 गवाहों के बयान और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर और दोनों पक्षों के वकीलों की बहस सुनने के बाद मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया था।

सौरभ हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाते हुए जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने महाभारत के तीन श्लोकों का जिक्र किया है। जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे ने बताया कि 163 पेज के आदेश में एक का श्लोक जिक्र करते हुए जिला जज ने कहा कि बाघ है तो जंगल सुरक्षित हैं। इसी तरह कानून है तो मनुष्य सुरक्षित हैं। न्याय का धर्म है अपराधी को अपराध की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार सजा मिले।

उन्होंने कहा कि मुस्कान और साहिल ने जो अपराध किया है उसे मृत्युदंड से कम सजा नहीं दी जानी चाहिए। डीजीसी ने बताया कि इस केस में 54 दिन की जांच के बाद पुलिस ने लगभग 1000 पेज का आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। 22 गवाहों ने न्यायालय में बयान दर्ज कराए थे। अब 590 दिन बाद दोनों दोषियों को सजा सुनाई गई है।

गवाहों की जुबानी, हत्याकांड की कहानी

गवाह नंबर 1: भाई से संपर्क न होने पर गहराया शक

18 मार्च 2025 को ब्रह्मपुरी थाने में उसने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उनके भाई सौरभ ने मुस्कान से प्रेम विवाह किया था। सौरभ ने उसे बताया था कि वर्ष 2019 से उसकी पत्नी मुस्कान रस्तौगी के साहिल शुक्ला से संबंध हैं। उसने यह भी कहा था कि उसे अपनी जान का खतरा है। सौरभ बेटी पीहू का जन्मदिन मनाने विदेश से मेरठ आया था। इसी दौरान पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल ने उसकी हत्या कर दी। मैंने सौरभ से संपर्क का प्रयास किया था। संपर्क न होने पर मुझे हत्या का शक होने लगा था।

गवाह नंबर 2 : ब्रह्मपुरी में नीले ड्रम से मिला था सुराग

मैंने ब्रह्मपुरी स्थित मकान में नीले ड्रम में शव मिलने की तहरीर दर्ज की थी। बाद में सौरभ के भाई की तहरीर पर मुस्कान के प्रेमी साहिल के साथ मिलकर पति की हत्या करने और शव के टुकड़े कर ड्रम में छिपाने की बात सामने आई।

गवाह नंबर 3 : साहिल से मिलती थी मुस्कान

सौरभ ने हमारी मर्जी के खिलाफ मोहल्ले की मुस्कान से शादी की थी। ससुराल में मुस्कान का व्यवहार बहुत खराब था। उन्हें पता चला कि सौरभ के लंदन जाने के बाद वह साहिल से मिलती थी। वह सौरभ से विवाह के बाद भी एक बार घर और बेटी को छोड़कर जा चुकी थी।

गवाह नंबर 4 : तीन मार्च की रात प्रेमी को घर में दाखिल होते देखा
तीन मार्च की रात मैंने साहिल को सौरभ के घर जाते देखा था। उस वक्त घर पर सौरभऔर मुस्कान मौजूद थे। बाद में पता चला कि उसी रात साहिल और मुस्कान ने मिलकर सौरभ की हत्या कर दी और शव को नीले ड्रम में छिपा दिया।

गवाह नंबर 5: फल काटने का बहाने बनाकर खरीदा चाकू और उस्तरा
एक लड़की मेरी दुकान पर सब्जी और फल काटने के बहाने चाकू और उस्तरा खरीदने आई थी। बाद में अखबार में फोटो देखकर मैंने उसे पहचाना कि वह मुस्कान ही थी।

गवाह नंबर 6 : अनाज के बहाने खरीदा था नीला ड्रम
मुस्कान और साहिल मेरी दुकान से अनाज रखने का बहाना बनाकर 1200 लीटर का नीला प्लास्टिक ड्रम खरीदकर ई-रिक्शा में ले गए थे। समाचार पत्र में फोटो देखकर मैंने दोनों को पहचाना।

गवाह नंबर 7 : शव को छिपाने के लिए खरीदी बालू और सीमेंट
एक लड़का और लड़की ई-रिक्शे से आए थे और बालू व सीमेंट खरीदकर ले गए थे। बाद में समाचारों से स्पष्ट हुआ कि वे मुस्कान और साहिल ही थे।

गवाह नंबर 8: कभी नहीं लिखी नशीली दवा
मुस्कान बुखार और कमजोरी का इलाज कराने आई थी। मैंने उसे सामान्य दवाएं दी थीं। मुस्कान के पर्चे पर मैंने नशीली दवा नहीं लिखी।

गवाह नंबर 9 :
डॉक्टर के पर्चे पर दी गई थी नशीली दवा
एक लड़की डॉक्टर देशवाल के पर्चे पर नशीली व अन्य दवाएं लेने आई थी। मैंने पर्चा देखकर दवा दी। वारदात के खुलासे के बाद फोटो देखकर पहचाना कि वह मुस्कान थी।

गवाह नंबर 10 : ड्रम काटते ही निकले सीमेंट में जमे शव के टुकड़े
पुलिस ने मुझे मोर्चरी बुलाकर नीला ड्रम काटने को कहा था। ड्रम काटने पर उसमें से सीमेंट, तकिए के खोल, एक सिरकटी लाश, दो हाथ के पंजे, उस्तरा और चाकू बरामद हुए। वह शव सौरभ का था।

गवाह नंबर 11 : नीले ड्रम में सीमेंट में जमे मिले थे शव के टुकड़े
ब्रह्मपुरी स्थित मकान में नीले ड्रम के अंदर सीमेंट में जमे सौरभ के शव के टुकड़े मिले थे। ड्रम कटवाने पर शव तीन टुकड़ों (सिर और हाथ के पंजे अलग) में मिला। सीमेंट में दबने के कारण शव सफेद पड़ चुका था।

गवाह नंबर 12 : हत्या से पहले दिया गया था जहर, छाती पर चाकू के निशान
सौरभ के हाथ के पंजे और सिर धड़ से अलग थे। छाती पर चाकू से वार के तीन गहरे निशान थे। मृत्यु से पूर्व उसे नशीला पदार्थ खिलाया गया था और शरीर पर कई धारदार चोटों के निशान थे।

गवाह नंबर 13 : मेरी कैब से गए थे मुस्कान और साहिल मनाली-कसोल घूमने
हत्या के बाद मुस्कान और साहिल मेरी कैब से कसोल, मनाली और मसूरी घूमने गए थे। दोनों खुद को पति-पत्नी बताते थे। 19 मार्च को अखबार में फोटो देखकर मुझे सच्चाई का पता चला।

गवाह नंबर 14 : पुलिस जांच में नक्शा व फर्द से खुला हत्या का सच
घटनास्थल के निरीक्षण, नक्शा नजरी और फर्द बरामदगी के जरिये जांच में मुस्कान के प्रेमी साहिल के साथ मिलकर पति सौरभ की हत्या करने और शव छिपाने का पूरा सच सामने आया था।

गवाह नंबर 15 : महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्यों की बरामदगी और विवेचना मामले की निष्पक्ष जांच करते हुए घटनास्थल व आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयोग किया गया और अन्य बरामद सामान को सील कर कोर्ट के समक्ष पेश किया गया।

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