
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने यह बात उत्तराखंड में 2022 में हुई अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में उसके माता-पिता को हिरासत में लिए जाने के संदर्भ में कही। राहुल गांधी ने कहा कि इस सरकार की पहचान ही है कि यह पीड़ितों की आवाज दबा देती है। सवाल पूछने वालों को रास्ते से हटा देती है।
19 वर्षीय अंकिता भंडारी के माता-पिता को गुरुवार सुबह रिहा कर दिया गया। इससे कुछ घंटे पहले, वे इंडिया गेट के पास विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, जहां उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। उनका यह विरोध प्रदर्शन सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति के खिलाफ था।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, ‘सुबह के 4 बजे। जब दुनिया सो रही थी, तब अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में ले लिया गया। उनका गुनाह क्या था? वे इंडिया गेट पर शांति से बैठे थे भारी मन से, बिना किसी हंगामे के। उनकी बस यही मांग थी कि जब तक सीबीआई जांच पूरी न हो जाए, तब तक दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल न बनाया जाए।’
सरकार की क्या पहचान है?
गांधी ने कहा, ‘कल प्रियंका और मैं इन माता-पिता से मिले थे। जांच के नतीजे आने से पहले ही उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया जल्दबाजी में पूरी कर दी गई। इसके साथ ही सवाल पूछने वाले माता-पिता को आधी रात को उठा लिया गया।’ लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, ‘इस सरकार की यही पहचान है: पीड़ितों की आवाज दबा दो, और सवाल पूछने वालों को रास्ते से हटा दो।’
गांधी ने जोर देकर कहा कि न्याय की यह लड़ाई न तो कभी दबेगी और न ही रुकेगी। उन्होंने ‘जस्टिस फॉर अंकिता भंडारी’ (अंकिता भंडारी के लिए न्याय) हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए कहा कि कांग्रेस अंकिता भंडारी के परिवार के साथ खड़ी है। उन्हें न्याय मिलने तक उनके साथ खड़ी रहेगी।
अंकिता के पिता ने क्या चेतावनी दी?
सूत्रों के अनुसार, उनके माता-पिता को सुबह करीब 5 बजे रिहा कर दिया गया। अंकिता के पिता ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार उनकी मांग नहीं मानती है, तो वे देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। उनके परिवार का आरोप है कि अंकिता की मौत में गौतम की अहम भूमिका थी।
किसे- किसे हिरासत में लिया गया?
माता-पिता के अलावा, कांग्रेस के कई नेताओं को भी हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। इनमें पार्टी के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा, सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, सोशल मीडिया विभाग की प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत और इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब शामिल थे। माता-पिता की मांग है कि जब तक इस मामले में सीबीआई की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक सिक्किम के राज्यपाल के रूप में गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।
क्या है पूरा मामला?
ऋषिकेश के वनंत्रा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली अंकिता की 18 सितंबर 2022 को हत्या कर दी गई थी। चार दिन बाद उसका शव चिल्ला नहर से बरामद किया गया। रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य (जो पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य के बेटे हैं) और उनके दो साथियों को इस मामले में दोषी ठहराया गया है और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
यह मामला तब राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया, जब आरोप लगे कि इस अपराध से कोई अज्ञात वीआईपी जुड़ा हुआ है। अंकिता के परिवार और कार्यकर्ताओं ने इस कथित वीआईपी एंगल की जांच की मांग की है। इन आरोपों के सिलसिले में गौतम का नाम भी सामने आया है।
गौतम ने इन आरोपों से इनकार किया है और उनके खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। कांग्रेस का दावा है कि यह नियुक्ति गौतम को बचाने के लिए की गई है। उनका तर्क है कि पद पर रहते हुए किसी राज्यपाल के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती।
