
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में पशुधन क्षेत्र को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने से जुड़े प्रस्ताव पर विशेष जोर दिया गया।
कैबिनेट में बताया गया कि उत्तर प्रदेश दूध उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है। इसके अलावा अंडा, ऊन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में भी प्रदेश की स्थिति मजबूत है। हालांकि, इन क्षेत्रों में मूल्य संवर्धन, डिजिटल प्रबंधन और संगठित बाजार व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत है।
पशुपालन से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
सरकार का उद्देश्य पशुपालन को किसानों की आय बढ़ाने का प्रमुख माध्यम बनाना है। इसके लिए स्टेट लैब स्टार्ट मिशन के गठन का प्रस्ताव रखा गया है। मिशन के तहत रोजगार सृजन, उद्यमिता विकास, पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने और पशु उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा।
योजना में उन्नत नस्ल के पशुओं को बढ़ावा देने और गाय की नस्ल सुधारने का भी प्रावधान है। दूध उत्पादन बढ़ाकर प्रति गाय प्रतिदिन 10 लीटर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही मुर्गी और बकरी पालन को प्रोत्साहित करने के लिए भी सहायता देने की बात कही गई है।
पशु बीमा में सरकार देगी 85 फीसदी राशि
प्रस्ताव के अनुसार, पशुपालकों को आर्थिक सहायता देने के साथ पशुओं का बीमा भी कराया जाएगा। बीमा की कुल लागत का 85 फीसदी हिस्सा सरकार और 15 फीसदी हिस्सा किसान वहन करेंगे। योजना के तहत एक गाय पर 50 हजार रुपये का अनुदान देने का प्रावधान बताया गया है। सरकार का उद्देश्य पशुपालन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, बेहतर नस्ल और बाजार व्यवस्था के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
यूपी में कंपनियों के मर्जर और डी-मर्जर पर स्टांप ड्यूटी का प्रावधान
उत्तर प्रदेश में कंपनियों के विलय (मर्जर) और विभाजन (डी-मर्जर) की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए स्टांप ड्यूटी से जुड़ा प्रस्ताव तैयार किया गया है। स्टांप मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि अभी तक प्रदेश में कंपनियों के मर्जर और डी-मर्जर के लिए स्टांप ड्यूटी का स्पष्ट प्रावधान नहीं था। इसके कारण उद्यमियों को प्रक्रिया के दौरान भ्रम और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
मंत्री के मुताबिक, प्रस्ताव के तहत कंपनी के मर्जर या डी-मर्जर में शेयर वैल्यू पर 0.50 फीसदी स्टांप ड्यूटी लगाने का प्रावधान किया गया है। यदि संबंधित मामले में संपत्ति शामिल है, तो उस पर दो फीसदी स्टांप ड्यूटी का प्रस्ताव है। कंपनी का पंजीकरण कराने और कंपनी रजिस्ट्रार (आरओसी) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शेयर वैल्यू के आधार पर स्टांप ड्यूटी देनी होगी।
सर्किल रेट के आधार पर ड्यूटी की समस्या होगी दूर
रविंद्र जायसवाल ने कहा कि स्पष्ट नियम नहीं होने के कारण कई मामलों में सर्किल रेट के बराबर स्टांप ड्यूटी की मांग की जाती थी। इससे कंपनियों के विलय के दौरान उद्यमियों के सामने मुश्किलें आती थीं। प्रस्ताव लागू होने से दो कंपनियों के मिलकर एक कंपनी बनने जैसी प्रक्रियाओं में स्पष्टता आने की उम्मीद है।
मंत्री ने बताया कि गुजरात और महाराष्ट्र में इस तरह का प्रावधान है। उत्तर प्रदेश में भी इसे लागू करने की दिशा में कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि स्टांप ड्यूटी का विषय समवर्ती सूची से जुड़ा होने के कारण प्रस्ताव को केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इसे प्रदेश में लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
यात्रियों और नाविकों को मिलेगा बीमा कवर
उत्तर प्रदेश में जल परिवहन को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए नावों और पानी के जहाजों के पंजीकरण की व्यवस्था की जाएगी। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि अब तक मोटर से चलने वाले जहाजों और नावों के संचालन को लेकर स्पष्ट नियमावली नहीं थी। नई व्यवस्था के तहत यांत्रिक और गैर-यांत्रिक दोनों तरह की नावों का पंजीकरण किया जाएगा।
बनेगी इनलैंड वाटर अथॉरिटी
मंत्री के मुताबिक, जल परिवहन के संचालन और निगरानी के लिए इनलैंड वाटर अथॉरिटी बनाई जाएगी। इसके अध्यक्ष परिवहन मंत्री होंगे। उन्होंने बताया कि इंजन से चलने वाले बड़े जहाज यांत्रिक श्रेणी में आएंगे, जबकि गांवों में इस्तेमाल होने वाली मोटर चालित छोटी नावों के लिए अलग श्रेणी निर्धारित की जाएगी।
नावों का वर्गीकरण यात्रियों की क्षमता के आधार पर भी किया जाएगा। इसमें 10 यात्रियों वाली मोटर नाव, पांच से 10 यात्रियों वाली नाव और पांच तक यात्रियों की क्षमता वाली नाव जैसी श्रेणियां शामिल होंगी। गैर-यात्री नावों के पंजीकरण के लिए 50 रुपये शुल्क प्रस्तावित है।
यात्रियों और नाविकों का होगा बीमा
दयाशंकर सिंह ने कहा कि जल परिवहन से जुड़े छोटे और असंगठित क्षेत्र को भी नियमों के दायरे में लाया जाएगा। नावों और नाविकों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, क्योंकि फिलहाल गैर-यांत्रिक नावों से जुड़ा व्यवस्थित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। नई व्यवस्था में यात्रियों और नाविकों के बीमा का भी प्रावधान होगा।
नावों के पंजीकरण और निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को दी जाएगी। इसमें सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) प्रशासन, तहसील स्तर के अधिकारी और आरआई की भूमिका होगी।
11 नदियों पर जल परिवहन की योजना
प्रदेश की गंगा और यमुना समेत 11 नदियों पर जल परिवहन को लेकर काम किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य नदियों के माध्यम से परिवहन की संभावनाओं को विकसित करना और नाव संचालन को अधिक सुरक्षित तथा व्यवस्थित बनाना है।
