लखनऊ: कबाड़ की दुकान में धमाका, कर्मचारी के उड़े चिथड़े, पहुंचे बम डिस्पोजल स्क्वायड और फोरेंसिक एक्सपर्ट

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लखनऊ कैंट के लकड़ी मोहाल स्थित कबाड़ की एक दुकान में मंगलवार दोपहर संदिग्ध हालात में तेज धमाका हुआ। धमाके की चपेट में आए दुकान के एक कर्मचारी के चिथड़े उड़ गए। सूचना पर पुलिस, बम डिस्पोजल स्क्वायड और फोरेंसिक टीम पहुंची और छानबीन की। धमाके का कारण अभी पता नहीं चल सका। फोरेंसिक एक्सपर्ट की एक टीम बुधवार को मौके पर जाकर जांच करेगी।

कैंट के आजाद मोहाल निवासी लक्ष्मीकांत गुप्ता उर्फ पप्पू स्क्रैप के कारोबारी हैं। लकड़ी मोहाल में उनकी दुकान है। हरदोई के बेनीगंज के हत्याहरण निवासी रामकृष्ण (34) दुकान में कर्मचारी थे। मंगलवार दोपहर रामकृष्ण कबाड़ से चीजों की छंटनी कर रहे थे। अन्य कर्मचारी बाहर थे। करीब तीन बजे अचानक से तेज धमाका हुआ। अन्य कर्मचारी जब भीतर पहुंचे तो देखा कि रामकृष्ण खून से लथपथ पड़े हैं। शरीर झुलसा और उसके चिथड़े उड़ गए हैं। सूचना पर डीसीपी पूर्वी समेत अन्य पुलिस अधिकारी, दमकलकर्मी और फोरेंसिक टीम पहुंची। शव को तुरंत मोर्चरी भेजकर परिजनों को सूचना दी गई।

आखिर धमाका किसमें और कैसे हुआ?
हादसे के बाद चर्चा थी कि ऑक्सीजन सिलिंडर फटने से धमाका हुआ। पर, जांच में इसकी पुष्टि नहीं हुई। एडीसीपी पूर्वी सैयद अली अब्बास ने बताया कि सिलिंडर ब्लास्ट होने के सुबूत नहीं मिले हैं। आशंका है कि किसी कंटेनर आदि में रखे केमिकल के संपर्क में ज्वलनशील पदार्थ आने से ब्लास्ट हुआ। इसकी पुष्टि के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम दोबारा जांच करेगी। फिलहाल दुकान में किसी तरह का काम न करने की हिदायत दी गई है। जिससे क्राइम सीन से छेड़छाड़ न हो सके।

अलग हो गया पैर का पंजा
रामकृष्ण का शव देख हर किसी की रूह कांप गई। चेहरा समेत पूरा शरीर झुलसा था। शरीर जगह-जगह फट गया था। मांस के लोथड़े आसपास बिखरे पड़े थे। एक पैर का पंजा भी अलग हो गया था। इससे एक बात तो साफ है कि धमाका बहुत जोरदार था। दुकान के कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि रामकृष्ण धूम्रपान करते थे। ऐसे में पुलिस को आशंका है कि धूम्रपान के दौरान ही तो नहीं धमाका हो गया?

दहल गया पूरा इलाका
धमाका बहुत जोरदार था। इससे आसपास का इलाका दहल गया। दुकान से सटे फर्नीचर के दुकानदार व कर्मचारियों के मुताबिक ऐसा लगा कि धमाके से कहीं दीवार या मकान न गिर जाए, इसलिए वह सभी भागकर बाहर निकल पड़े। कबाड़ की दुकान के अन्य कर्मचारी बसारत और बबलू कुछ ही देर पहले बाहर निकले थे। बसारत खाना खाने गए थे। बबलू बाहर बैठे थे। तभी धमाका हुआ। अगर ये दोनों भी भीतर काम कर रहे होते तो हादसे का शिकार हो सकते थे।

तीन साल से कर रहे थे काम
मृतक के भांजे देवेश ने बताया कि रामकृष्ण यहां अकेले रहकर काम करते थे। उनके पिता बृजलाल, मां, पत्नी व दोनों बच्चे गांव में ही रहते हैं। इस दुकान पर रामकृष्ण करीब तीन साल से काम कर रहे थे। वह यहीं रहते भी थे।

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