
साल 1988 में प्रयागराज संसदीय सीट पर उपचुनाव हो रहा था. बोफोर्स दलाली कांड के बाद कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले वीपी सिंह चुनावी मैदान में थे. कांग्रेस ने उनके खिलाफ पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे सनील शास्त्री को मैदान में उतारा था. लेकिन वीपी सिंह की लोकप्रियता को देखते हुए राजीव गांधी को ‘राम’ की शरण में जाना पड़ा था और उन्होंने अरुण गोविल से सुनील शास्त्री के समर्थन में प्रयागराज में चुनाव प्रचार करवाया था.
रामानंद सागर द्वारा निर्देशित मशहूर टीवी सीरियल ‘रामायण’ में राम की भूमिका निभाने वाले अभिनेता अरुण गोविल भाजपा के टिकट पर मेरठ से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने आज अपना नामांकन दाखिल कर दिया. लेकिन क्या आपको पता है कि एक समय अरुण गोविल कांग्रेस में शामिल हुए थे और ‘रामायण’ में रावण की भूमिका निभाने वाले दिवंगत अभिनेता अरविंद त्रिवेदी ने भाजपा का दामन थामा था. हम आपको इस लेख में अरुण गोविल के जीवन से जुड़े कुछ ऐसे ही रोचक किस्से बता रहे हैं…
‘रामायण’ में राम का किरदार निभाकर अरुण गोविल घर-घर में अपनी पहचान बना चुके थे. उनकी लोकप्रियता इतनी चरम पर पहुंच गई थी कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उन्हें कांग्रेस में शामिल होने की पेशकश की. बता दें कि राजीव गांधी ने ही अपने कार्यकाल के दौरान हिंदू भावनाओं का सम्मान करते हुए सबसे पहले बाबरी मस्जिद के ताले खुलवाए थे. साल 1988 में अरुण गोविल को राजीव गांधी ने कांग्रेस की सदस्यता दिलवाई और उन्हें चुनाव लड़ने का ऑफर भी दिया था. लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था. कहानी शुरू होती है बोफोर्स दलाली कांड से. भारत सरकार और स्वीडन की हथियार निर्माता कंपनी एबी बोफोर्स के बीच 24 मार्च, 1986 को 1437 करोड़ रुपये का सौदा हुआ था. इस सौदे के तहत एबी बोफोर्स को भारतीय थल सेना के लिए 155 एमएम की 400 होवित्जर तोपों की सप्लाई करनी थी. 16 अप्रैल, 1987 स्वीडिश रेडियो ने सनसनीखेज दावा किया कि एबी बोफोर्स कंपनी ने इस सौदे की बोली जीतने के लिए भारतीय राजनीतिज्ञों और रक्षा विभाग के अधिकारियों को पैसे खिलाए थे. स्वीडिश रेडियो के मुताबिक बोफोर्स ने सौदा हथियाने के लिए भारतीय नेताओं को 60 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी.
