
ये तो हम सब जानते भी हैं और मानते भी हैं कि हम एक महान देश के नागरिक हैं। और, इस देश में दो देशों के लोग रहते हैं, एक है भारत और दूसरा इंडिया। दोनों के रास्ते सड़कों के गड्ढे की वजह से ही एक दूसरे को काटते हैं। औसतन दो रुपये प्रति किमी टोल वाले हाईवे जैसी कोई व्यवस्था शहरों के भीतर भी हुई तो तय है कि अमीर और गरीब के ये रास्ते फिर कभी एक दूसरे को नहीं काटेंगे। वेब सीरीज ‘कॉल मी बे’ इंडिया की कहानी है। ये शाइनिंग इंडिया है। और, यहां साझे के मकान की पेशगी देने के लिए संघर्ष कर रही युवती भी डिजाइनर कपड़ों में दिख सकती है। जूनियर रिपोर्टर ओला या ऊबर से सफर कर सकती है। और, लाइव न्यूज के बीच एक एंकर किसी महिला के गर्भवती होने का एलान बिना उसकी सहमति से करके भी बचा रह सकता है। निजता इस सीरीज में दिखा रात का उल्लू है और समझना ये है कि ये उल्लू इस सीरीज की नायिका का ‘स्पिरिट एनीमल’ है। क्या कहा? ‘स्पिरिट एनीमल’ नहीं पता, फिर ये सीरीज आपके लिए नहीं है, यू पुअर मिर्जापुर वाचर्स!
‘फॉलो कर लो यार’ के आगे की कहानी
तो जिस इंडिया की ये कहानी है, उसकी बेला चौधरी का ट्रॉमा अगर आपने समझ लिया तो ये सीरीज आपको जानी पहचानी सी लगेगी। ये ‘कहानी घर घर की’ है, लेकिन इसे ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ लिखने वाली इशिता मोइत्रा की सोची दुनिया में रचा गया है। साउथ दिल्ली से लेकर साउथ बॉम्बे तक इस सीरीज के डीएनए में हैं। दक्षिण की शैक्षिक दर वैसे ही भारत में भी सबसे ज्यादा ही रही है। घर से निकाली नारी भारत में अबला बनती है, इंडिया में वह ‘बे’ है। अबे, तबे वाला बे नहीं, बे। ये ‘बे’ बेबी का बी गिर जाने से बनता है। पूरा नाम वैसे इनका बेला चौधरी है तो यहां बी नहीं ला गिरा है। मिसेज चौधरी की ये कहानी ससुराल और मायके के उसूलों, दस्तूरों और मिजाज की बात करने की बजाय वाया एक न्यूज चैनल सोशल होने की कोशिश करती है। कहानी की असली जीत इस बात में हैं कि इसका पूरा वातावरण अगर आप अपने अपने हिसाब से सोचते बदलते चलें तो आपको समझ आएगा कि इंडिया और भारत की सोच में ज्यादा फर्क है नहीं। वहां का स्पिरिट एनीमल यहां लक्ष्मीजी का वाहन है!
ये मेरा इंडिया, आई लव माय इंडिया!
कहानी औऱ सीरीज का निर्देशन एक खास तबके के दर्शकों को ध्यान में रखकर किया गया है सो ‘मिर्जापुर’ देखने वालों को ये सीरीज कतई नापसंद हो सकती है। ‘फॉलो कर लो यार’ को पसंद करने वालों के लिए ये सीरीज थोड़ा ऊपर से भी जा सकती है। सो खतरा दोनों तरफ से है क्योंकि ये सीरीज बीच का रास्ता पकड़कर चलती है। इसे समझने के लिए सीरीज में वीर दास के अरनब जैसे किरदार की मनोदशा और घर से निकाली गई बे की मनोदशा के बीच तनी हुई डोरी पर चलना दर्शकों के लिए खुद भी किसी करतब को दिखाने से कम नहीं है। लेकिन, इसकी आत्मा सही जगह पर है। इंडिया के जिस एक खास तबके के लिए संघर्ष, सपने और संवेदनाएं सब आपस में गड्ड-मड्ड हो चुकी हैं, उनकी आंखों पर रात में भी लगा धूप का चश्मा उतारने की इस सीरीज की कोशिश अच्छी है, लेकिन निर्देशक कॉनिल डि कुन्हा इसमें दर्शकों से रिश्ता बनाने से चूक गए हैं।
धर्मा कार्नरस्टोन का अनन्य सौरमंडल
मुंबई में लिंक रोड पर यशराज फिल्म्स को मुड़ने वाली गली से ठीक पहले अनन्या पांडे के दो पोस्टर दिखते हैं। एक ‘कॉल मी बे’ का दूसरा किसी सौंदर्य उत्पाद का। अनन्या पांडे का अस्तित्व इन दोनों के बीच में कहीं का है। वह धर्मा की अपनी टैलेंट एजेंसी धर्मा कॉर्नरस्टोन की कलाकार हैं। उनके साथ एक मैनेजर चलता है, तीन लोग मेकअप के लिए और तीन लोग बाल बनाने के लिए चलते हैं। पर्सनल सेक्योरिटी, पर्सनल बॉय औऱ पर्सनल ड्राइवर इसमें जोड़ें तो कुल नौ लोग उनके आभा मंडल के चारों तरफ हर समय चक्कर लगाने को मुस्तैद रहते हैं। और, ये सारा डिटेल ये सीरीज ही बताती चलती है। अभिनय अनन्या पांडे का सेंसेक्स जैसा है। कभी ऊपर तो कभी नीचे। ‘कॉल मी बे’ में उनका भाव गिरा हुआ है। कहती तो वह हैं कि सीरीज की कहानी उन्होंने एक झटके में पूरी पढ़ डाली थी। लेकिन, सीरीज में उनके अभिनय में ताजगी नहीं है। चेहरा उनका कुछ खास भावों के साथ सेट हो चुका है। प्रयोग करने की कोशिश करती वो दिखती नहीं हैं।
टीआरपी के लिए कुछ भी करेगा!
सीरीज ‘कॉल मी बे’ के बाकी कलाकारों में वीर दास के तेवर उनके किरदार जैसे हैं। लेकिन, किसी न्यूज चैनल में कोई एंकर हाफ पैंट पहनकर एंकरिंग करता है, अपने दशक भर लंबे न्यूज चैनल के अनुभव में मुझे तो नहीं दिखा। इस काल्पनिक चैनल का नाम टीआरपी है, जिसमें एक बंदा हमेशा कुछ भी बनकर स्वांग रचने को उतावला दिखता है। कोफ्त ये सब देखकर इसलिए भी होती है कि सीरीज के कार्यकारी निर्माताओं में से एक सोमेन मिश्रा खुद न्यूज चैनल में काम कर चुके हैं। इशिता मोइत्रा भी कुछ कुछ इसी पृष्ठभूमि की है। यशराज और धर्मा में उनका रुआब चलता है। उनके आसपास की दुनिया ‘बैड न्यूज’ से लेकर ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ के बीच फैली हुई है। और, इस सबके बीच जो सबसे अच्छी बात सीरीज की है वह इसमें महिला किरदारों की रीढ़ को मजबूत होते हुए दिखना। ऐसे किरदार सीरीज में खूब है जिन्हें ‘आजादी’ की ये हवा खूब रास आती है।
