
पटना की हवा इस वक्त उत्सुकता से भरी हुई है ऐसी उत्सुकता, जो किसी बड़े राजनीतिक क्षण से ठीक पहले पूरे शहर को अपनी गिरफ्त में ले लेती है। गांधी मैदान पूरी तरह सज चुका है। मंच तैयार है, पंडालों की पंक्तियाँ चमक रही हैं और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। मीडिया के कैमरे उसी दिशा में टिके हुए हैं, जहां कुछ ही देर में बिहार की राजनीति का एक और नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।
आज, गुरुवार को, नीतीश कुमार दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। यह दृश्य एक साधारण राजनीतिक समारोह नहीं, बल्कि एक ऐसे नेता की निरंतरता का प्रतीक है जिसने दशकों से बिहार की राजनीति को अपनी शैली में दिशा दी है।बुधवार को एनडीए विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार को सर्वसम्मति से नेता चुना गया। इसके तुरंत बाद वे राजभवन जाते हैं, अपने पद से इस्तीफा सौंपते हैं और फिर से सरकार बनाने का दावा पेश करते हैं।
उनके साथ चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा, धर्मेंद्र प्रधान, ललन सिंह और कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहते हैं जो यह संकेत देते हैं कि एनडीए इस बार पहले से अधिक एकजुट दिखाई दे रहा है।नई सरकार का चेहरा भी अब लगभग साफ हो चुका है। भाजपा ने अपने विधायक दल का नेता सम्राट चौधरी और उपनेता विजय कुमार सिन्हा को चुना है। इससे यह बात लगभग तय हो रही है कि दोनों नेता बतौर उपमुख्यमंत्री आज शपथ लेने वाले हैं। भाजपा बहुत बड़े बदलाव के मूड में नहीं है, इसलिए पुराने मंत्री ही दोबारा दिखाई देने की संभावना मजबूत है। मंत्रिमंडल में नए चेहरों की एंट्री चिराग पासवान की लोजपा(आर), उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो और जीतन राम मांझी की हम से होने वाली है। यह गठबंधन की व्यापकता और सामाजिक समीकरण को और मजबूत करता है।
