DAY-2 IMA CGP@GSVM Medical College Kanpur:-“संयम ही है लंबे जीवन की गारंटी”

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41वें IMA सीजीपी रिफ्रेशर कोर्स के दूसरे दिन की शुरुआत, करते हुए मुख्य वक्ता डॉक्टर पुनीत दीक्षित ने न्यूरो की कई आपातकालीन बीमारियों के विषय में बताया न्यूरो की बहुत सारी ऐसी बीमारियां हैं जिनका समय पर इलाज ना मिले तो जान जाने का खतरा बढ़ जाता है तथा इन बीमारियों में नसों का फालिश,इस मांसपेशियों की बीमारियां तथा spine की बीमारी प्रमुख तत्पश्चात ,उन्होंने बेहोशी coma के बारे में भी बताया

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और इसके बारे में चर्चा भी की इस संदर्भ में सबसे पहले नशे में तथा मेडिसिन से होने वाली बेहोशी के बारे में भी बताया तथा उसके बाद किडनी तथा लीवर के खराब होने के बारे में भी चर्चा की .तत्पश्चात उन्होंने बताया दिमागी बुखार मिर्गी तथा ब्रेन हेमरेज से होने वाली बेहोशी के विषय में बताया डॉक्टर पुनीत दीक्षित ने इस विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि फालीश के मरीजों में टाइम इस ब्रेन समय ही दिमाग होता है.

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क्योंकि हर 10 मिनट में लगभग 2 करोड़ सेल नष्ट हो जाते हैं और सही टाइम पर दवा द्वारा क्लॉट हटा दिया जाए तो मरीज के विकलांगता काफी हद तक कम हो सकती है. डॉक्टर विकास शुक्ला ने बताया शरीर के किसी भी अंग में कमजोरी होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें समय ही जीवन है डॉ पुनीत दीक्षित ने बताया कि स्मोकिंग छोड़ने से रोज कसरत करने से बीपी और शुगर तथा कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखा जा सकता है

जिससे पॉलिसी से बचा जा सकता है अगर किसी व्यक्ति को एक बार पॉलिश मर गया है तो उसे व्यक्ति के जीवन भर खून पतला करने की दवा लेनी चाहिए इस प्रोग्राम में डायरेक्टर प्रोफेसर नवनीत कुमार तथा विषय विशेष डॉक्टर विकास शुक्ला तथा आलोक वर्मा और डॉक्टर भानु प्रताप सिंह राठौड़ आदि मौजूद रहे।

आँखों की सुरक्षा में समय महत्वपूर्ण।शीघ्र  चिकित्सा सहायता से रोके गंभीर नुक़सान
आँखों की आपातकालीन स्थितियाँ ऐसी समस्याएँ होती हैं जिन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है। यह स्थितियाँ आँखों को गंभीर नुकसान या दृष्टि हानि से बचाने के लिए शीघ्र उपचार की मांग करती हैं। आई एम ए के वार्षिक समारोह में लखनऊ से आये लखनऊ ऑप्थलमिक सोसाइटी के मुख्य सचिव व वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ जतिंदर वाही ने कुछ सामान्य आँखों की आपातकालीन स्थितियाँ और उनके लक्षण के बारे में बताया और समय रहते उसका क्या उपचार करें जिससे होने वाले नुक़सान को रोका जा सके ।
1.कॉर्नियल एब्रेशन: कॉर्निया पर खरोंच, जो धूल, रेत या नाखून जैसी वस्तुओं से हो सकती है। इसके लक्षणों में दर्द, लालिमा, आंसू और रोशनी की संवेदनशीलता शामिल हैं।
2.आँख में वस्तु का फँसना : धातु के टुकड़े, लकड़ी के छींटे या कांच के टुकड़े जैसी वस्तुओं का आँख में फंसना। यह दर्द, आंसू और धुंधली दृष्टि का कारण बन सकता है।
3.रासायनिक जलन: साफ-सफाई के एजेंट या औद्योगिक रसायनों के संपर्क से आँखों में जलन हो सकती है। इसे तुरंत साफ पानी से धोना चाहिए और तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
4.एक्यूट ग्लूकोमा: अचानक आँख के प्रेशर में वृद्धि, जो तेज दर्द, सिरदर्द, मतली और धुंधली दृष्टि का कारण बन सकती है। इसे तुरंत इलाज की आवश्यकता होती है।
5.अचानक दृष्टि हानि: एक या दोनों आँखों में अचानक दृष्टि का चला जाना गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है, जैसे स्ट्रोक या ऑप्टिक न्यूराइटिस। इसे तुरंत चिकित्सा जांच की आवश्यकता होती है।
तत्काल कदम:
•शांत रहें: घबराएं नहीं, आँखों को मले या दबाएं नहीं।
•फँसी वस्तु न हटाएं: यदि कोई वस्तु आँख में फंसी हो, तो उसे स्वयं न हटाएं। आँख को ढककर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
•रासायनिक जलन को धोएं: यदि कोई रसायन आँख में चला गया हो, तो उसे साफ पानी से कम से कम 15-20 मिनट तक धोएं और फिर चिकित्सा सहायता लें।
किसी भी अचानक या गंभीर आँख संबंधी समस्या होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करें। शीघ्र उपचार आपकी दृष्टि को बचा सकता है और आगे की समस्याओं को रोक सकता है।
इस प्रोग्राम के मुख्य संचालक शंकर कार्तिक नेत्रालय के मेडिकल डायरेक्टर डॉ मनीष सक्सेना थे । शहर के वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ जैसे डॉ शरद बाजपेयी , डॉ दिलप्रीत सिंह , डॉ संगीता शुक्ला, डॉ शालिनी मोहन, डॉ सोनिया दमेले , डॉ पारुल सिंह , डॉ लोकेश अरोड़ा, डॉ मनीष त्रिवेदी आदि ने भी आपातकालीन स्थिति में संयम रखने और विशेषज्ञ से शीघ्र उपचार कराने पर ज़ोर दिया ।
थाइरोइड की समस्याएं – हमारी जागरूकता के साथ समझ में आने लगी है। सामान्यतः 2 प्रकार की थाइरोइड समस्याएं हम देखते है –

ह्य्पोथयरॉडिज़्म(HYPOTHYRODISM)- जो की काफी सामान्य है 9-10 % जनसंख्या में होती है।

हाइपरथायरायडिज्म (HYPERTHYRODISM) – स्त्रियों में 1-2% और पुरुषों में 0.1-0.2% जनसंख्या में होती है। दोनों समस्याओं को मिलाकर तीन आकस्मिक स्थितियाँ बनती है।
1. MYXEDEMA COMA ( मैक्सेडेमा कोमा )
2. THYROTOXIC CRISIS(थाइरोटोक्सिक क्राइसिस ) तथा
3. निगाह पर असर डालने वाली स्थितियाँ।
MYXEDEMA COMA ( मैक्सेडेमा कोमा ) जिसमे ज्यादातर मरीज सुस्त, बेहोश, शरीर का तापमान कम, BP, हृदय गति आदि कम हो जाते है। इसको पहचानना तथा समय पर उपचार से जान बचाना सम्भव होता है।
दूसरी समस्या होती हैं – THYROTOXIC CRISIS (थाइरोटोक्सिक क्राइसिस ) जिसमे थाइरोइड हॉर्मोन आकस्मिक रूप से अत्यधिक बढ़ जाता हैं। अचानक वजन कम होना, शरीर का तापमान बढ़ना , हृदयगति अत्यधिक बढ़ जाना , बेहोश हो जाना। कई बार यह जानलेवा भी हो जाता हैं। इसका समय पर इलाज हो जाने से मरीज को बचाया जा सकता है।
तीसरी समस्यां होती हैं थाइरोइड का आँखों पर असर। यह देखा गया हैं की 50% थाइरोटोक्सिक 40% ह्य्पोथयरॉइड तथा 10% सामान्य थाइरोइड में आँखों में असर आता। कई बार इससे निगाह पर भी असर पड़ता हैं और कभी -कभी इतना अधिक की निगाह भी जा सकती हैं। दवाइयों तथा सर्जरी द्वारा इलाज सम्भव है।
यह जानकारी AMU(Aligarh) ENDOCRINOLOGY विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर हामिद अशरफ ने दी । इस सत्र का संचालन डॉO ऋषि शुक्ला ने किया। इसमें चेयरपर्सन डॉO संगीता शुक्ला ,डॉO अनुराग बाजपाई तथा डॉO शिवेंद्र वर्मा रहे।

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