
Covid-19: दक्षिण-पूर्व एशिया में कोविड-19 के मामलों में हाल ही में हुई वृद्धि के बाद, भारत में भी नए मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं, जिनमें से अधिकांश केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु से सामने आए हैं। आइए विशेषज्ञ से समझते हैं कि आखिर कोरोना अचानक कैसे बढ़ने लगा?
कोरोनावायरस संक्रमण के मामले भारत सहित दुनिया के कई देशों में बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। विशेषतौर पर एशियाई देशों- हांगकांग-सिंगापुर, चीन के बाद अब भारत में भी इसके मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के डैशबोर्ड के मुताबिक देश में फिलहाल कोरोना के 257 एक्टिव केस हैं, केरल सबसे प्रभावित राज्य है।
दिल्ली-एनसीआर और आसपास के शहरों में भी संक्रमितों की पुष्टि की गई है। गुरुग्राम और फरीदाबाद में कोरोनावायरस संक्रमण के तीन मामले सामने आए हैं। एक अधिकारी ने गुरुवार बताया कि गुरुग्राम से दो और फरीदाबाद से एक मामला सामने आया। गुरुग्राम में हाल ही में मुंबई से लौटी 31 वर्षीय महिला में संक्रमण की पुष्टि हुई है, वहीं दूसरे मरीज की कोई ट्रैवेल हिस्ट्री नहीं रही है।
दक्षिण-पूर्व एशिया में कोविड-19 के मामलों में हुई हालिया वृद्धि के बाद, भारत में भी लोगों को अलर्ट किया गया है। यहां अधिकांश मामले केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु से सामने आए हैं। अच्छी बात ये है कि ज्यादातर मामले हल्के हैं और लोगों को गंभीर दिक्कतें नहीं हो रही हैं।
उत्तर प्रदेश में हालात की समीक्षा
कोविड-19 के बढ़ते मामलों को लेकर बनी चिंता के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में प्रदेश में कोविड-19 की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने जनता को आश्वस्त किया कि राज्य में चिंता की कोई बात नहीं है, हालांकि वैश्विक संदर्भ को देखते हुए सतर्कता और एहतियात जरूरी है।
आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा कि केंद्र सरकार ने कोविड-19 के संबंध में कोई नई एडवाइजरी जारी नहीं की है। फिर भी सभी लोगों को अपने जोखिमों को देखते हुए अलर्ट पर रहने की जरूरत है।
ओमिक्रॉन ही है बढ़ते संक्रमण की प्रमुख वजह
मेडिकल रिपोर्ट्स पर नजर डालें तो पता चलता है कि दुनियाभर में बढ़ते संक्रमण के लिए ओमिक्रॉन का JN.1 वैरिएंट जिम्मेदार है। अलग-अलग हिस्सों में ओमिक्रॉन के कुछ अन्य सब-वैरिएंट्स भी देखे जा रहे हैं, हालांकि इन सभी की प्रकृति लगभग समान है।
– इससे संक्रमितों में ज्यादा गंभीर रोग विकसित होने का खतरा नहीं रहता है।
– जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है या फिर जिन्हें पहले से एक-दो क्रॉनिक बीमारियां (कोमोरबिडिटी) रही हैं, उनमें इसके कारण गंभीर समस्याएं विकसित होने का खतरा हो सकता है।
