
लखनऊ अग्निकांड में अधिकांश छात्रों की मौत दम घुटने से हुई है। कुछ शव बुरी तरह जल गए थे, जिन्हें बोरे में भरकर एंबुलेंस से पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया। देर रात तक टॉर्च की रोशनी में मलबे के बीच शवों की तलाश होती रही।
लखनऊ के अलीगंज में कोचिंग संस्थान की बिल्डिंग में लगी आग में फंसे लोग मदद की गुहार लगाते रहे। तेज लपटों के बीच बिल्डिंग के अंदर से आने वाली चीत्कारें ऐसी थीं कि बाहर खड़े लोग भी अंदर तक दहल जाते थे। आग के बीच मदद की गुहार लगाने वाले बच्चों की आवाजें थोड़ी देर बाद शांत होती चली गईं।
इससे पहले कि राहत और बचाव कार्य शुरू हो पाता 15 लोगों की जान चली गई। चिकित्सकों का कहना है कि प्रथमदृष्टया सभी की मौत दम घुटने से होना प्रतीत हो रहा है। धुएं के कारण दम घुटने से लोगों की सांसें थम गईं। इसके बाद आग से लोगों के शव झुलस गए।
आग पर काबू पाने के बाद दमकल और एसडीआरएफ के जवानों ने एक-एक कर शवों को बाहर निकाला। कुछ शव बुरी तरह जल गए थे, जिन्हें बोरे में भरकर एंबुलेंस से पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया। देर रात तक टॉर्च की रोशनी में मलबे के बीच शवों की तलाश होती रही। सुरक्षा के लिहाज से रात तक बड़ी संख्या में पुलिस बल घटना स्थल पर मौजूद रहा।
मौके पर नहीं आया भवन स्वामी
बिल्डिंग में आग की खबर पाकर सैकड़ों की संख्या में लोग जमा हो गए। पुलिस ने लोगों को किनारे हटाकर बचाव कार्य शुरू किया। इतनी भयावह घटना की जानकारी मिलने के बाद भी भवन स्वामी वीरेंद्र वहां नहीं पहुंचे। घटना स्थल पर बड़ी संख्या में महिलाएं भी आ गई थीं, जिनकी आंखों में आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। महिला पुलिसकर्मियों ने किसी तरह महिलाओं को संभाला और वहां से हटाया।
नीचे सीढ़ियों पर आग, ऊपर की ओर बंद था दरवाजा
अलीगंज के जिस व्यावसायिक स्थल पर आग लगी थी, वहां पर लोग चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे थे कि छत पर जाने का दरवाजा खुल गया होता तो शायद तमाम लोगों की जिंदगी बच जाती। आग ने नीचे जाने वाले सीढ़ियों को अपनी गिरफ्त में ले लिया था। इसलिए परिसर में फंसे लोग जान बचाने के लिए ऊपर की तरफ भागे थे।
घटना स्थल पर लोगों ने बताया कि आग से घिरे लोग ऊपर की ओर भागे। उन्होंने छत का दरवाजा खोलने की बहुत कोशिश की, मगर वह नहीं खुला। अगर दरवाजा खुल गया होता तो छत से पास के मकान की छत पर कूद कर जान बचा सकते थे। मगर, व्यावसायिक स्थल के ऊपर का दरवाजा खुल नहीं सका, जिससे सीढ़ियों पर फंसे लोगों की झुलसने और दम घुटने से मौत हो गई।
हादसे का संकेत दे रहा था एमसीबी, फिर भी नहीं चेते
किरायेदारों ने भवन की देखरेख करने वाले से कई बार की थी एमसीबी ट्रिप होने की शिकायत
अलीगंज स्थित बिल्डिंग में आग में अपना पालतू पशु गंवाने वाली महिला के चेहरे पर दिखा गम और गुस्सा। दूसरी ओर, अग्निकांड में अपने को खोने के बाद रोते-बिलखते परिजन। अमर उजाला
भवन के किरायेदारों ने बताया कि व्यावसायिक स्थल की देखरेख का काम अखिलेश शुक्ला करते हैं। जब से गर्मी शुरू हुई थी तब से रोजाना दिन में कई बार एमसीबी ट्रिप हो रहा था। इसकी शिकायत को नजरअंदाज कर एमसीबी को फिर से चालू कर दिया जाता था।
तीन कारणों से ट्रिप करता है एमसीबी
लेसा के सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता सुरेश बहादुर सिंह ने बताया कि एमसीबी के बार-बार ट्रिप होने के प्रमुख रूप से तीन कारण होते हैं।
ऐसे में संभावित कारणों की जांच कराना जरूरी होता है। एमसीबी के ट्रिप होने का पहला कारण परिसर में कहीं पर शॉर्ट सर्किट का होना है। दूसरा, स्वीकृत लोड से ज्यादा लोड पर बिजली जलाना और तीसरा आंतरिक वायरिंग में कोई तकनीकी खामी का बार-बार उत्पन्न होना होता है।
आवासीय इलाके में व्यावसायिक गतिविधियों से परेशान थे पड़ोसी
लखनऊ के अलीगंज के सेक्टर-डी में सोमवार दोपहर जिस बहुमंजिला भवन में आग लगी वह आवासीय इलाके में बनाई गई है। इसकी व्यावसायिक गतिविधियों से पड़ोसी परेशान थे। वाहनों की पार्किंग, भीड़भाड़ को लेकर पड़ोसियों ने कई बार शिकायतें भी कीं।
आंचलिक विज्ञान नगरी से आगे बढ़ने पर दाहिनी ओर जो सड़क है, वहां आगे रिहायशी इलाका है। जिस बिल्डिंग में आग लगी, उस तरफ 15 मकान हैं। इन मकानों में एक गली से अगली गली के बीच स्थित इन मकानों में सिर्फ दो व्यावसायिक प्रतिष्ठान ही हैं, जिसमें से एक में हादसा हुआ। पड़ोस में रहने वाली महिला ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि व्यावसायिक गतिविधियों के चलते चैन से रहना मुहाल हो गया था।
लोगों की आवाजाही के चलते भी कहासुनी की नौबतें आती रही हैं। अलीगंज में जहां हादसा हुआ है, उसके सामने गहरा नाला है। इस नाले पर कई जगहों पर पत्थर नहीं हैं। इससे लोगों के नाले में गिरने की आशंका बनी हुई है। लिहाजा सोमवार को जब दुर्घटना हुई तो रात के अंधेरे में नाले में लोग गिर न जाएं, इसके लिए सुरक्षाकर्मियों को तैनात करना पड़ा।
यूट्यूबर और इंफ्लुएंसर भी पहुंचे
अलीगंज में आग की घटना की सूचना मिलते ही यूट्यूबर और इंफ्लुएंसरों का भी जमावड़ा हो गया, जिसे हटाने में सुरक्षाकर्मियों को देर रात तक मशक्कत करनी पड़ी। रीलबाजों को कई बार मौके से खदेड़ा गया।
वैकल्पिक रास्तों से पहुंचे घटनास्थल तक
लखनऊ के पुरनिया चौराहे के पास हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर इलाके के दो प्रमुख मार्गों को बंद कर दिया। इससे लोगों को घटनास्थल तक आने-जाने के लिए सीतापुर रोड की ओर से वैकल्पिक मार्ग का सहारा लेना पड़ा। आईटी चौराहे से अलीगंज जाने वाले मार्ग पर भी यातायात के भार से वाहन रेंगते नजर आए।
