
समाजवादी पार्टी को दो बड़े झटके लगे हैं। बदायूं सीट से सपा के प्रत्याशी शिवपाल यादव ने मैदान छोड़ने का एलान कर दिया है। जब से टिकट फाइनल हुआ था, तब से ही टिकट बदलने की चर्चा शुरू हो गई थी। उन्होंने खुद चुनाव से हटने का एलान किया, साथ ही बदायूं लोकसभा सीट से बेटे को उम्मीदवार बनाने का एलान किया। हालांकि अभी तक सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उधर, सपा विधायक आशुतोष मौर्य के परिवार ने भी पाला बदल लिया है। उनकी पत्नी और बहन ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। आशुतोष ने खुद बगावती रुख अपनाया हुआ है, ऐसे में बदायूं सीट पर समीकरण बदलेंगे।
दरअसल, सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने रविवार को बड़ा एलान करते हुए सबको चौंका दिया। उन्होंने एलान किया कि उनकी जगह अब बदायूं लोकसभा सीट से उनके बेटे आदित्य यादव मैदान में होंगे। वह बहुत ही जल्दी नवरात्र में नामांकन करेंगे। नवरात्र में शुभ और अच्छा होता है।
शिवपाल ने रविवार को बिसौली विधानसभा इलाके के अहमदगंज की चुनावी सभा में कहा कि यह चुनाव बहुत ही महत्वपूर्ण है। साथ ही आदित्य यादव का नाम लिए बगैर ही कहा, चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अब तो बन गए हैं… पता है, पता है, इसके बाद लोगों की ओर से नाम आया आदित्य यादव। आदित्य यादव जिंदाबाद के नारे भी लगे फिर शिवपाल सिंह यादव ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा- देखिए, पहले तो लखनऊ से उनका ही नाम चला था। लेकिन खासतौर से युवाओं की मांग पर अब आदित्य यादव प्रत्याशी हो गए हैं।
समाजवादी पार्टी को दो बड़े झटके लगे हैं। बदायूं सीट से सपा के प्रत्याशी शिवपाल यादव ने मैदान छोड़ने का एलान कर दिया है। जब से टिकट फाइनल हुआ था, तब से ही टिकट बदलने की चर्चा शुरू हो गई थी। उन्होंने खुद चुनाव से हटने का एलान किया, साथ ही बदायूं लोकसभा सीट से बेटे को उम्मीदवार बनाने का एलान किया। हालांकि अभी तक सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उधर, सपा विधायक आशुतोष मौर्य के परिवार ने भी पाला बदल लिया है। उनकी पत्नी और बहन ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। आशुतोष ने खुद बगावती रुख अपनाया हुआ है, ऐसे में बदायूं सीट पर समीकरण बदलेंगे।
20 फरवरी को हुआ था शिवपाल के नाम का एलान
20 फरवरी को सपा मुखिया ने शिवपाल सिंह यादव को बदायूं लोकसभा सीट से उम्मीदवार घोषित किया था। उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद भी वह निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव प्रचार करने नहीं पहुंचे थे, तब चर्चा चली थी कि वह चुनाव नहीं लड़ना चाहते, शिवपाल सिंह यादव विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहना चाहते हैं। हालांकि 14 मार्च को शिवपाल सिंह बदायूं आए।
