DAY-1 IMA CGP Kanpur: जी.एस.वी.एम. मेडिकल कॉलेज में स्लीप रिलेटेड डिसआर्डर पर व्याख्यान

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आई. एम. ए. सी. जी. पी. के प्रथम दिन जी. एस. वी.एम. मेडिकल कालेज में स्लीप रिलेटेड डिसआर्डर पर कार्यशाला का आयोजन किया । कार्यशाला में के.जी.एम.यू. से डा. आनन्द श्रीवास्तव एव डा. ममता उपाध्याय ने व्याख्यान दिया । डा. ममता ने बताया कि समाज में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया प्रशिक्षित के मरीजो को संख्या लगातार बढ़ रही है । जिसका मुख्य कारण बढ़ता मोटापा एवं आरामायाक रहन-सहन है। डा आनन्द कुमार श्रीवास्तव ने ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के निदान एवं इलाज के बारे में बताया। व्याख्यान के पश्चात प्रतिभागियो के लिए बीमारी की जाँच एवं उपचार सम्बन्धी उपकरणो के उपायों एव लाभ के बारे में प्रशिक्षित किया गया ।

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प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. आनन्द कुमार ने बताया कि स्कोप obstructive की स्लीप एपनिया की जानकारी के प्रसार हेतु ऐसी और कार्यशालाए समय-समय पर किए जाने की आवश्यकता है जिससे लोगो को ऐसी समस्याओ से बचाया जा सके।
I.M.A. C.G.P. में रेस्पिरेट्री मेडिसिन से जुड़े आकस्मिक समस्याओं पर अमृता इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज के डॉक्टर सौरभ पाहुजा द्वारा व्याख्यान दिया गया | डॉ सौरभ पाहुजा न्यूमोथोरैक्स पल्मोनरी एम्बोलिज्म ए. आर. डी. एस. एवं संस्थान में सी.ओ.पी.डी. एवं अस्थमा एवं सी.ओ.पी.डी की गंभीरताओं के निदान एवं त्वरित उपचार में हुई प्रगति के बारे में प्रतिभागियों को अवगत कराया | डॉ आनंद कुमार ने बताया कि सामान्य अस्पताल में आने इमरजेंसी में रेस्पिरेटरी इमरजेंसी काफी संख्या में आते हैं जिनका उचित निदान एवं उपचार मरीजों की जान बचाने में सहायक है|

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इस व्याख्यान में डॉ. ए.के. सिंह, डॉ. रिचा गिरी, डॉ. अवधेश कुमार, डॉ. नंदिनी रस्तोगी, डॉ. अनुराग शुक्ला, डॉ विकास शुक्ला, डॉ. प्रीति शुक्ला, डॉ. कुनाल सहाय, डॉ. शालिनी मोहन, डॉ. मनीष निगम, डॉ. दीपक श्रीवास्तव, डॉ बृजेंद्र शुक्ला आदि लोग मुख्य रूप से उपस्थित रहे.

रीढ़ की हड्डी के दर्द को नजर अंदाज़ ना करें 

41st IMA REFRESHERS कोर्स के पहले दिन न्यूरो सर्ज़री के सेशन में मुख्य वक्ता डॉ. बी. के. ओझा ( विभागाध्यक्ष न्यूरोसर्जरी विभाग एवं डीन KGMU लखनऊ ) ने बताया कि रीढ़ की हड्डी के दर्द को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए ।
यह दर्द किसी गंभीर समस्या का पहला लक्षण हो सकता है ।उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं के अलावा भी अन्य बीमारियों में मरीज़ के हाथों एवं पैरों के लकवा होने की संभावना हो सकती है । अगर कमर दर्द के साथ मरीज़ को पैरों की कमज़ोरी या सुन्नपन का एहसास हो तो तुरंत ही न्यूरो सर्जन से संपर्क करें ।इसके साथ ही अगर टट्टी / पेशाब का नियंत्रण भी प्रभावित लग रहा हो तो तत्काल ही विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए । लंबे समय से कमर दर्द के साथ अगर बुख़ार हो तो स्पाइन टी. बी. की संभावना हो सकती है ।स्पाइन टी. बी. समस्या आजकल तेज़ी से बढ़ रही है । रात्रि के समय होने वाला कमर का दर्द स्पाइनल ट्यूमर का पहला लक्षण हो सकता है। इस प्रकार की सभी समस्याओं के लिए उचित समय पर जाँच ( विशेषकर एम. आर. आई. ) करानी चाहिए।
बुजुर्ग महिलाओं एवं व्यक्तियों रीढ़ की हड्डी में ऑस्टियोपोरोसिस की वजह से बहुत हल्की चोट लगने पर भी फ्रैक्चर हो सकते हैं जो कि दर्द एवं लकवे का स्वरूप ले सकते हैं । चोट लगने के बाद स्पाइन के मरीज़ को उचित कॉलर या बेल्ट के साथ ही ट्रांसपोर्ट करना चाहिए ।
प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि स्पाइन से सम्बंधित पहले लक्षण जैसे कमर दर्द या हाथ पैरों में सुन्नपन को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
इस प्रोग्राम में डॉ. आई. एन. वाजपेयी, डॉ. जयंत वर्मा , डॉ. मनीष सिंह , डॉ. विकास शुक्ला , डॉ. प्रीति शुक्ला एवं शहर के अन्य न्यूरोसर्जन एवं चिकित्सक भी उपस्थित रहे ।

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