
बालोतरा के पचपदरा में 79,459 करोड़ रुपये की एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी रिकॉर्ड स्तर की इंजीनियरिंग से बनी। 15 हजार ओलंपिक पूल जितनी खुदाई और 40 गुना एफिल टॉवर स्टील इस्तेमाल हुआ।
बालोतरा के पचपदरा में बनी एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी केवल देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाली परियोजना नहीं है, बल्कि इंजीनियरिंग और निर्माण क्षमता का भी एक अनूठा उदाहरण बनकर सामने आई है। करीब 79,459 करोड़ रुपए के निवेश से तैयार इस मेगा प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान 1.5 करोड़ घन मीटर मिट्टी हटाई गई, जो लगभग 15 हजार ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल भरने के बराबर है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यह खुदाई गीजा के पिरामिड के निर्माण से करीब छह गुना अधिक है।
रिफाइनरी के निर्माण में 16 लाख घन मीटर कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया, जो बुर्ज खलीफा के निर्माण में लगे कंक्रीट से लगभग पांच गुना अधिक है। वहीं करीब 3 लाख मीट्रिक टन स्टील का उपयोग हुआ, जो एफिल टॉवर में इस्तेमाल स्टील से करीब 40 गुना ज्यादा है। पूरे परिसर में 28 हजार किलोमीटर लंबी केबल बिछाई गई है, जिसकी लंबाई पृथ्वी के व्यास से भी दोगुनी है। इसके अलावा रिफाइनरी में बना 125 मीटर ऊंचा कोक डोम अपनी तरह का अनूठा ढांचा है, जिसे गोल गुम्बज से लगभग तीन गुना बड़ा बताया जाता है।
निर्माण के दौरान इस परियोजना ने रोजगार के क्षेत्र में भी बड़ा योगदान दिया। निर्माण चरण में करीब 35 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला, जबकि परिवहन, निर्माण सामग्री, मशीनरी और अन्य सहायक क्षेत्रों में लगभग एक लाख अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए। परियोजना के संचालन के साथ अब पश्चिमी राजस्थान में पेट्रोकेमिकल एवं प्लास्टिक उद्योगों का नया इकोसिस्टम विकसित होने की उम्मीद है, जिससे एमएसएमई, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स और एग्री-फिल्म्स जैसे उद्योगों को भी नई गति मिलेगी।
रिफाइनरी उद्घाटन से पहले फिर चुनौती: तेज आंधी में गिरे होर्डिंग्स
जिस राजस्थान रिफाइनरी के उद्घाटन का लंबे समय से इंतजार है, वहां उद्घाटन से ठीक पहले एक जोरदार तूफान ने सारी व्यवस्थाओं को अस्त व्यस्त कर दिया। शुक्रवार देर रात बालोतरा के पचपदरा में तेज आंधी से कार्यक्रम स्थल पर लगे कई बड़े होर्डिंग्स और बैनर क्षतिग्रस्त हो गए। इससे पहले 21 अप्रैल को प्रस्तावित उद्घाटन कार्यक्रम भी रिफाइनरी परिसर में आग लगने के बाद स्थगित करना पड़ा था।
