
UP Kanpur:- डॉ. दीक्षा तिवारी की मौत के मामले ने मेडिकल कॉलेज कैंपस की सुरक्षा की पोल खोल दी है। कॉलेज कैंपस के विभिन्न स्थानों पर सुरक्षा गार्ड तैनात होने और कैमरे की नजर होने का दावा खोखला निकला है।
कानपुर में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के 95 एकड़ के दायरे में फैले कैंपस की सुरक्षा के लिए सिर्फ 20 कर्मचारी हैं। इनमें 10 चौकीदार हैं और 10 सुरक्षा गार्ड हैं। कर्मचारी कम होने की वजह से कैंपस के हर कोने में सुरक्षा गार्ड नहीं पहुंच पाता।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि 36 सिक्योरिटी गार्ड के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। चुनाव आचार संहिता लागू होने की वजह से प्रक्रिया शुरू नहीं हुई थी। ये सुरक्षा गार्ड पूर्व सैनिक होंगे। वहीं दूसरी तरफ कॉलेज कैंपस में विभिन्न विभागों के कर्मचारी भी रहते हैं।
इन्हें डीएम कार्यालय की ओर से आवास आवंटित किए जाते हैं। इनके आने-जाने से भी सभी गेट खुले रहते हैं। प्रबंधन के अधिकारियों का कहना है कि दूसरे विभागों को आवास आवंटन के मामले में कॉलेज प्रबंधन से भी नहीं पूछा जाता। दूसरे विभागों के लोग कैंपस का अनुशासन भी नहीं मानते हैं। इससे आए दिन झगड़े की नौबत रहती है।
कैमरे की नजर होने का दावा निकला खोखला
डॉ. दीक्षा तिवारी की मौत के मामले ने मेडिकल कॉलेज कैंपस की सुरक्षा की पोल खोल दी है। कॉलेज कैंपस के विभिन्न स्थानों पर सुरक्षा गार्ड तैनात होने और कैमरे की नजर होने का दावा खोखला निकला है। डॉ. दीक्षा और उनके बैच मेट डॉ. मयंक और डॉ. हिमांशु को किसी ने न टोका और न रोका।
कैंपस की सुरक्षा को लेकर बनी कार्ययोजना भी बेकार
गार्ड ने रोका होता तो हादसा बच सकता था। कैंपस की सुरक्षा की स्थिति को लेकर कॉलेज प्रबंधन ने जांच कमेटी गठित कर दी है। कमेटी सुरक्षा में छेदों की जांच करके अपनी रिपोर्ट प्रबंधन देगी। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन कैंपस की सुरक्षा को लेकर जो कार्ययोजना बनाई थी, वह थोथी निकली।
परीक्षा भवन की तरफ वाला क्षेत्र सुनसान रहता है
कॉलेज के मुख्य गेट से लेकर छात्रावासों तक, चिकित्सा शिक्षकों के आवास, आडिटोरियम के पास सुरक्षा गार्डों के तैनात रहने के बिंदु बनाए गए थे। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में इन बिंदुओं को रखा गया था। परीक्षा भवन की तरफ वाला क्षेत्र में सुनसान रहता है। रात में वहां आने-जाने की किसी को जरूरत नहीं होती। यह सुरक्षा बिंदु भी है।
किसी सुरक्षा गार्ड का न टोकना गंभीर बात अगर यहां सुरक्षा गार्ड तैनात होता तो उन्हें रोकता और घटना बच सकती थी। जूनियर डॉक्टरों का आना-जाना मुख्य गेट से सीधी छात्रावासों तक जाने वाली सड़क पर अधिक रहता है। इसके साथ ही एसबीआई की सड़क से लोग आते-जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कैंपस में डेढ़ बजे रात के एक युवती और दो युवकों का कैंपस के सन्नाटे वाले स्थान पर जाना और किसी सुरक्षा गार्ड का न टोकना गंभीर बात है।
कमेटी विभिन्न बिंदुओं पर जांच करके रिपोर्ट देगी
कॉलेज प्रबंधन ने घटना के बाद कॉलेज कैंपस की सुरक्षा को लेकर जांच कमेटी गठित की है। इसमें सीनियर सर्जन प्रोफेसर जीडी यादव, प्रॉक्टर डॉ. यशवंत राव और ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग की नोडल अधिकारी डॉ. लुबना खान शामिल हैं। उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरि ने बताया कि कमेटी विभिन्न बिंदुओं पर जांच करके रिपोर्ट देगी।
मेडिकल कॉलेज में कब-कब हुई घटनाए
@ 21 अक्टूबर 2021- मेडिकल कालेज में मानव संपदा कार्यालय में चोरी हुए कंप्यूटर। स्वरूप नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज।
@ 2 सितंबर 2021- मेडिकल कालेज परिसर में मेस संचालक अमन रावत की गोली मारकर हत्या कर दी गई। स्वरूप नगर थाने में रिपोर्ट।
@ 29 जून 2023 – मेडिकल कालेज के एक डॉक्टर ने महिला का अश्लील वीडियो बनाया, महिला का आरोप था कि मेडिकल कालेज में ही वीडियो बनाया गया। मामले की रिपोर्ट स्वरूप नगर थाने में दर्ज।
@ 20 मई 2024- मेडिकल कालेज परिसर में रहने वाली एक युवती से शोहदे ने परिसर में घुसकर छेड़छ़ाड़ की। पीटा और मोबाइल तोड़ा। रिपोर्ट दर्ज।
@ मेडिकल कॉलेज परिसर से आए दिन बाइक चोरी की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
@मेडिकल कालेज और हैलट में सुरक्षा इंतजामों के बारे में जानकारी की जाएगी। मेडिकल कालेज प्रशासन से इस बारे में बात कर सुरक्षा को और मजबूत बनाया जाएगा। -आरएस गौतम, डीसीपी सेंट्रल
