‘बैठाओ इसको जीप में…’, जब कानपुर में भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष को पुलिस ने जबरदस्ती गाड़ी में बैठाया

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कानपुर में भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष को एक दुकानदार की हत्या के मामले में इंस्पेक्टर से बहस करना महंगा साबित हुआ. इंस्पेक्टर ने पुलिसकर्मियों के द्वारा भाजपा नेता को जबरन पुलिस की गाड़ी में बैठाया और उन्हें लेकर चकेरी थाने पर लेकर आ गए. इससे गुस्साए भाजपा कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर धरना दिया. भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष ने कहा कि जबतक इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर नहीं किया जाता, हम धरना देते रहेंगे.

दरअसल चकेरी थाना क्षेत्र में एक दबंग द्वारा सिगरेट न देने पर पान दुकानदार हर्ष की सरेआम हत्या कर दी गई थी. इसके बाद भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष हर्ष प्रताप सिंह पीड़ित परिवार के घर पहंचे, जहां पोस्टमार्टम के बाद उनके परिवार वाले बॉडी को उतरने नहीं दे रहे थे. इस दौरान हर्ष प्रताप सिंह ने चकेरी के इंस्पेक्टर अशोक कुमार दुबे से पूछ लिया कि क्या कार्रवाई हो रही है. उन्होंने बताया एक आरोपी यीशु यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है. इस मामले में अन्य आरोपियों पर कार्रवाई को लेकर बहस होने लगी, तभी इंस्पेक्टर अशोक दुबे ने उन्हें धकियाते हुए अपने सिपाहियों से कहा इनको जीप में डालो.

इसके बाद भाजपा जिलाध्यक्ष को लेकर पुलिस चकेरी थाने आ गई. हर्ष प्रताप ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इंस्पेक्टर ने मेरे साथ बदतमीजी करते हुए कहा था कि इसको गाड़ी में बैठाओ और लेकर चलो थाने. इसके बाद हमारे कार्यकर्ताओं ने थाना घेर लिया और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. हमारी मांग है कि जबतक इंस्पेक्टर अशोक दुबे को लाइन हाजिर नहीं किया जाता और और बदतमीजी करने वाले दोनों सिपाहियों को सस्पेंड नहीं किया जाता, हम धरने से नहीं हटेंगे.

DCP का क्या कहना है? 
इसकी सूचना पर डीसीपी, एडीसीपी मौके पर आ गए. जहां पुलिस अधिकारी पहले पुलिसकर्मियों द्वारा माफी मांगने की बात कहते रहे जिस पर भाजपा कार्यकर्ता नहीं माने. इसको लेकर देर रात दोनों पक्षों के बीच बातचीत चलती रही. इस मामले में डीसीपी दिनेश त्रिपाठी का कहना है दोनों पक्षों में बात की जा रही है. मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी, दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है.

कानपुर में मंत्री भी पहुंच गई थीं थाने 
इससे पहले कानपुर पुलिस ने यूपी सरकार की मंत्री प्रतिभा शुक्ला का फोन तक नहीं उठाया था. उन्होंने अपने कार्यकर्ता के साथ मारपीट की एफआईआर दर्ज करवाने के लिए छह बार अधिकारियों को कॉल किया था, लेकिन उन्होंने कॉल नहीं उठाया, जिसके बाद देर रात मंत्री अपने पति और पूर्व सांसद अनिल शुक्ला वारसी के साथ थाने पहुंच गई थीं.

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