
यपी के बहराइच में पिछले साल हुई हिंसा में मारे गए रामगोपाल हत्याकांड में आरोपी सरफराज को फांसी की सजा हुई है। कोर्ट ने नौ आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। बहराइच जिले में पिछले साल दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान विवाद के बाद रामगोपाल की हत्या हुई थी। हत्या के बाद पूरे जिले में हिंसा भड़क गई थी।
रामगोपाल हत्याकांड का फैसला अभियोजन और पुलिस पैरवी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन एक दोषी को फांसी और नौ को आजीवन कारावास की सजा दिलाने में सबसे अहम भूमिका उन 12 प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की रही, जिन्होंने अदालत के समक्ष घटना स्थल का आंखों देखा हाल बयां किया। गवाहों के इसी सशक्त पक्ष ने मामले को मजबूती प्रदान की।
चर्चित हत्याकांड पर प्रदेश सरकार भी लगातार नजर बनाए हुए थी। इसी का परिणाम रहा कि सभी नामजद आरोपी शीघ्र ही गिरफ्तार कर जेल भेजे गए। पुलिस से ताबड़तोड़ मुठभेड़ भी हुई। विवेचना अधिकारी ने तेजी दिखाते हुए साक्ष्यों और गवाहों के बयान एकत्र कर 11 जनवरी 2025 को आरोपपत्र अदालत में प्रस्तुत कर दिया।
अदालत ने 18 फरवरी 2025 को आरोप निर्धारित किए। अभियोजन पक्ष की ओर से चार मार्च 2025 से गवाहों के बयान शुरू कराए गए। करीब आठ महीनों की सुनवाई के दौरान कुल 12 गवाहों ने घटना के संबंध में अदालत में बयान दर्ज कराए।
आठ गवाहों के बयान भी साबित हुए निर्णायक
इनमें मृतक रामगोपाल के बड़े भाई हरमिलन, अभिषेक मिश्रा, शशि भूषण और राजन के बयान बेहद अहम माने गए। अन्य आठ गवाहों के बयान भी आरोपियों को दोषसिद्ध कराने में निर्णायक साबित हुए।
अदालत में पूरी घटना का वर्णन
सभी गवाह घटना वाले दिन मौके पर मौजूद थे और उन्होंने अदालत में पूरी घटना का वर्णन किया। मजबूत गवाही का परिणाम रहा कि 13 माह 26 दिनों तक की सुनवाई के बाद अदालत ने मुख्य आरोपी को फांसी और नौ को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
जानिए 13 अक्तूबर 2024 को महराजगंज में कब क्या हुआ था
– बहराइच जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर स्थित महराजगंज बाजार में शाम करीब 6 बजे दुर्गा प्रतिमा विसर्जन का जुलूस निकाला जा रहा था। इसी दौरान दूसरे पक्ष ने डीजे बंद करने के लिए कहा। यहीं से विवाद शुरू हुआ।
– देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा और जुलूस पर पथराव शुरू हो गया। पथराव, आगजनी और करीब 20 राउंड से अधिक फायरिंग हुई।
– इसी दौरान रेहुवा मंसूर निवासी रामगोपाल मिश्रा एक घर की छत पर चढ़ गया, जहां लगे झंडे को उतारकर उसकी जगह भगवा झंडा फहरा दिया।
– घर के मालिक अब्दुल हमीद, उनके बेटे सरफराज व अन्य पर आरोप था कि रामगोपाल को बेरहमी से पीटा और फिर गोली मार दी। लखनऊ ले जाते समय उसकी मौत हो गई।
– रामगोपाल की मौत की खबर फैलते ही भीड़ भड़क उठी। लोगों ने सड़क जाम कर दी और विसर्जन रोककर रातभर प्रदर्शन किया। तत्कालीन डीएम मोनिका रानी मौके पर पहुंचीं।
– अगले दिन रामगोपाल का शव लेकर निकली भीड़ को पुलिस ने समझाया, तो परिजन वापस लौट गए। लेकिन भीड़ ने उग्र होकर महसी तहसील के मुख्य बाजार में आगजनी शुरू कर दी।
– हालात काबू करने के लिए पांच थानों की फोर्स और दो बटालियन पीएसी तैनात की गई। करीब पांच से छह हजार की भीड़ जुट गई।
– स्थिति गंभीर होती देखकर लखनऊ से एसटीएफ चीफ और एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश बहराइच पहुंचे थे।
– पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के आधार पर मुख्य आरोपियों की पहचान कर 13 को आरोपी बनाया।
– आरोपियों ने अपने बचाव में कई दलील दी। लगभग 14 माह की कानूनी प्रक्रिया के बाद फैसला सुरक्षित किया गया।
रामगोपाल हत्याकांड में सरफराज को फांसी की सजा, नौ को उम्रकैद
बहराइच के चर्चित रामगोपाल हत्याकांड में बृहस्पतिवार को प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मोहम्मद सरफराज को फांसी की सजा सुनाई। मामले में दोषी अब्दुल हमीद, मोहम्मद फहीम, सैफ अली, मोहम्मद तालिब, जावेद खान, मोहम्मद जीशान, शोएब खान, ननकऊ व मारूफ को आजीवन कठोर कारावास से दंडित किया। सभी दोषियों पर अलग-अलग अर्थदंड भी लगाया गया है। फैसले के दौरान कचहरी परिसर का बाहरी इलाका पुलिस छावनी में तब्दील रहा।
महसी तहसील क्षेत्र के महराजगंज में 13 अक्तूबर 2024 को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान विवाद शुरू हुआ। इस दौरान रेहुआ मंसूर गांव निवासी रामगोपाल मिश्रा की जघन्य हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे जिले में तनाव बढ़ा।
महसी क्षेत्र में दंगा शुरू हो गया। हालात नियंत्रित करने के लिए कर्फ्यू लगाना पड़ा। दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश हुए। इंटरनेट सेवा भी बाधित करनी पड़ी। करीब एक सप्ताह तक हालात खराब रहे। मामले में हरदी एसओ सुरेश कुमार वर्मा व महसी चौकी इंचार्ज शिव कुमार सरोज को निलंबित किया गया था।
रामगोपाल के परिजनों की तहरीर पर हरदी पुलिस ने 13 अक्तूबर को ही फहीम, सरफराज उर्फ रिंकू, मोहम्मद तालिब उर्फ सबलू, सैफ अली, जावेद खान, मोहम्मद जीशान उर्फ राजा, शोएब खान, ननकऊ, खुर्शीद, शकील अहमद उर्फ बबलू, मोहम्मद अफजल उर्फ कल्लू को नामजद किया।
पिता के सामने बेटे को सजा, डबडबाई आंखें
हत्या, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मुख्य आरोपी अब्दुल हमीद के तीन बेटे सरफराज, मोहम्मद फहीम, मोहम्मद तालिब वारदात में शामिल पाए गए। न्यायालय ने बृहस्पतिवार को जब सरफराज को फांसी की सजा सुनाई, उस समय अब्दुल हमीद और उसके दोनों बेटे फहीम व तालिब पास ही खड़े थे। सजा सुनते ही तीनों की आंखें भर आईं।
अलग-अलग जुर्माना
फांसी की सजा पाए सरफराज उर्फ रिंकू पर 1.30 लाख का अर्थदंड लगाया गया है। अब्दुल हमीद पर 1.81 लाख, फहीम, सैफ अली, ननकऊ, जिशान, शोएब, मारूफ अली और फहीम पर डेढ़-डेढ़ लाख, जावेद पर 1.20 लाख और तालिब पर 50 हजार का अर्थदंड लगाया गया है।
कोर्ट ने तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए कर दिया था बरी
पुलिस ने 11 जनवरी 2025 को आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया। नौ दिसंबर को प्रथम अपर जिला व सत्र न्यायाधीश ने खुर्शीद, शकील उर्फ बबलू और मोहम्मद अफजाल उर्फ कल्लू को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया और 10 आरोपियों को दोषी करार देते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया।
बृहस्पतिवार देर शाम न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा द्वितीय की कोर्ट ने अभियोजन व बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलील सुनने के बाद फैसला सुनाते हुए घटना में सरफराज उर्फ रिंकू पर कड़ी टिप्पणी करते हुए फांसी की सजा सुनाई। नौ अन्य दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए अलग-अलग अर्थदंड लगाया। अर्थदंड की धनराशि अदा न करने पर सभी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
